रांची। सदर अस्पताल परिसर स्थित सभागार में सोमवार को जन आरोग्य समिति (जेएएस) के सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समिति के सदस्यों को उनके दायित्वों, कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं में जनभागीदारी की अहम भूमिका से अवगत कराना था।
कार्यक्रम की शुरुआत जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रीति चौधरी ने करते हुए बताया कि प्रत्येक आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जन आरोग्य समिति का गठन किया गया है। समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत के मुखिया होते हैं, जबकि इसके सदस्य के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, सहिया, महिला ग्राम संगठन की प्रतिनिधि और अन्य ग्रामीण शामिल रहते हैं।
राज्य कार्यक्रम समन्वयक अकाय मिंज ने स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि जन आरोग्य समिति स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, वित्तीय प्रबंधन और समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
राज्य नोडल पदाधिकारी (टीबी एवं सीपीएचसी) डॉ. कमलेश कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त पंचायत का लक्ष्य केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि समाज में फैले डर, भ्रांतियों और भेदभाव को खत्म करना भी है। उन्होंने बताया कि देश में हर साल लगभग चार लाख लोगों की मौत टीबी से होती है, हालांकि झारखंड में टीबी मृत्यु दर में कमी आई है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि दो सप्ताह से अधिक खांसी, बुखार, वजन घटना या सांस की परेशानी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। उल्लेखनीय है कि रांची जिले की 14 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। यह सफलता स्वास्थ्य कर्मियों, पंचायत प्रतिनिधियों और समुदाय के सहयोग से संभव हुई है। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अधिकारी, मुखिया और स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।



