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गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों पर प्रशासन का हंटर, पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य

रांची: शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मानकों के अनुरूप बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रांची के उन सभी निजी और गैर-सरकारी स्कूलों को 8 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से मान्यता

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रांची: शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और मानकों के अनुरूप बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, रांची के उन सभी निजी और गैर-सरकारी स्कूलों को 8 अप्रैल 2026 तक अनिवार्य रूप से मान्यता के लिए आवेदन करना होगा, जो अब तक बिना विभागीय स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं।

क्या है उपायुक्त का आदेश

रांची के उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजंत्री ने स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 से कक्षा 8 तक संचालित होने वाले सभी विद्यालयों को ‘झारखंड निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली, 2011’ के संशोधित प्रावधानों के तहत मान्यता प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। यदि कोई विद्यालय इस समय-सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसे बंद करने की नौबत भी आ सकती है।

आवेदन की प्रक्रिया और पोर्टल

विद्यालयों की सुविधा के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन रखा गया है। स्कूल प्रबंधन को विभागीय पोर्टल https://rte.jharkhand.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण करना होगा। पोर्टल पर ‘यूजर मैनुअल’ और ‘मान्यता प्रमाण-पत्र’ का प्रारूप भी उपलब्ध है, ताकि संचालकों को फॉर्म भरने में कोई परेशानी न हो।

इन मानकों पर खरा उतरना होगा जरूरी

सिर्फ आवेदन कर देना ही काफी नहीं होगा। स्कूलों को अपनी आधारभूत संरचना की पूरी जानकारी देनी होगी, जिसमें प्रमुख हैं:

  • योग्य शिक्षक: स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यता मानकों के अनुसार होनी चाहिए।

  • सुरक्षा व्यवस्था: बच्चों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।

  • बुनियादी सुविधाएं: स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय और पर्याप्त क्लासरूम।

  • छात्र नामांकन: छात्रों की संख्या और नामांकन का पारदर्शी रिकॉर्ड।

नहीं मानने पर होगी विधिसम्मत कार्रवाई

प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो स्कूल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करेंगे या समय पर आवेदन नहीं देंगे, उनके खिलाफ नियमावली की कंडिका-12(6) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने सभी स्कूल संचालकों और प्राचार्यों से अपील की है कि वे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस निर्देश को गंभीरता से लें और अपने विद्यालय का संचालन विधिसम्मत बनाएं।

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