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रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही उस समय हंगामेदार हो गई, जब सत्तापक्ष के वरिष्ठ विधायक हेमलाल मुर्मू ने राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के नए प्रोटोकॉल पर गंभीर आपत्ति जताई। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए मुर्मू ने केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लिया, जिससे सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई।
‘वंदे मातरम’ की अनिवार्यता पर मुर्मू के तर्क
विधायक हेमलाल मुर्मू ने सदन में कहा कि हाल के दिनों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ से पहले गाना अनिवार्य किया जाना एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में सांप्रदायिकता की झलक देता है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक विवादों का जिक्र करते हुए तर्क दिया कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। मुर्मू ने केवल प्रतीकों पर ही नहीं, बल्कि केंद्र की योजनाओं के नामकरण, विशेषकर मनरेगा और ओबीसी आरक्षण के मुद्दों पर भी मोदी सरकार की जमकर आलोचना की।
विपक्ष का पलटवार: ‘राष्ट्र गौरव पर आपत्ति क्यों?’
मुर्मू के भाषण के दौरान भाजपा विधायकों ने कड़ा रुख अपनाया। पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक नीरा यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर पूरे देश को गर्व है, उस पर सत्तापक्ष के सदस्यों को आपत्ति क्यों हो रही है, यह समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर केंद्र के हर सकारात्मक फैसले का विरोध करने की राजनीति कर रही है।
चुनाव और राजनीति का आरोप
बहस में हस्तक्षेप करते हुए विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम’ प्रोटोकॉल की बात की जा रही है, वह बंगाल चुनाव और राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखकर लाया जा रहा है। इस पर नीरा यादव ने फिर टोकते हुए कहा कि सदस्यों को राज्यपाल के अभिभाषण के मुख्य बिंदुओं पर बात करनी चाहिए, न कि इधर-उधर के भाषण देकर सदन का समय बर्बाद करना चाहिए। सदन में इस दौरान उमाकांत रजक सहित अन्य सदस्यों ने भी अपनी बातें रखीं, लेकिन राष्ट्रगीत का मुद्दा पूरे दिन चर्चा का केंद्र बना रहा।

