Seoul, South Korea: कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर कूटनीतिक तनाव गहराता नजर आ रहा है। उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की ओर से भेजी जाने वाली मानवीय चिकित्सा सहायता (Medical Aid) की पेशकश को सिरे से खारिज कर दिया है। प्योंगयांग ने इसे एक ‘अपमान’ और ‘राजनीतिक उकसावा’ करार दिया है। उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग-उन की ताकतवर बहन किम यो-जोंग ने एक तीखा बयान जारी कर इस पूरी योजना पर कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या थी दक्षिण कोरिया की योजना?
इससे पहले दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय (Unification Ministry) ने यह घोषणा की थी कि वे मानवीय चिकित्सा सहायता कार्यक्रम के तहत प्योंगयांग के एक अस्पताल को राहत सामग्री भेजने की योजना बना रहे हैं। इस खेप में करीब 166 श्रेणियों की 1,431 प्रकार की मेडिकल सामग्रियां शामिल थीं, जो सामान्य जांच, सर्जरी और गंभीर इलाज के लिए बेहद जरूरी मानी जाती हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोल प्रशासन ने इसके लिए इस साल मई में संयुक्त राष्ट्र (UN) सुरक्षा परिषद की उत्तर कोरिया प्रतिबंध समिति से विशेष छूट भी हासिल कर ली थी।
‘भद्दा नाटक और राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन’ – किम यो-जोंग
उत्तर कोरिया की ओर से तीखी प्रतिक्रिया देते हुए किम यो-जोंग ने सोल के इस कदम को “शोर-शराबे वाली और भद्दी हरकत” तथा “एक और घटिया नाटक” बताया। उन्होंने कहा, “यह हमारे देश का सीधा अपमान है, हमारे खिलाफ राजनीतिक मकसद से रचा गया उकसावा है और हमारे राष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है।”
किम ने तंज कसते हुए कहा कि जब उनके इस पुराने नाटकों से अच्छे बॉक्स-ऑफिस रिकॉर्ड की उम्मीद करना नामुमकिन हो गया, तो उन्होंने ‘मेडिकल उपकरणों की मदद’ के नाम पर एक नया ड्रामा शुरू कर दिया है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि प्योंगयांग का दक्षिण कोरिया के साथ जुड़ने या बातचीत करने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा कि उनके पास दक्षिण कोरिया के साथ आदान-प्रदान करने या आमने-सामने आने के लिए कुछ भी नहीं है।
रिश्तों की जमी बर्फ और अनिश्चित भविष्य
लगातार बिगड़ते राजनीतिक रिश्तों के कारण दोनों देशों के बीच संवाद और आपसी मेलजोल के रास्ते पहले ही लगभग पूरी तरह बंद हो चुके हैं। ऐसे में विश्लेषकों का मानना था कि उत्तर कोरिया इस मदद को स्वीकार करेगा या नहीं, इस पर संशय बना हुआ था।
दक्षिण कोरियाई मंत्रालय के अधिकारियों का भी यह मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए इस मानवीय सहायता के प्योंगयांग तक पहुँचने की संभावना बेहद कम है। सरकार अब इस मामले में संयुक्त राष्ट्र से समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध करने पर विचार कर रही है। दोनों पड़ोसी देशों के बीच बढ़ती इस तल्खी ने एक बार फिर क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।





