रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुल 27 प्रस्तावों पर चर्चा हुई। इनमें से 25 प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई, जबकि दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को फिलहाल स्थगित रखा गया है। दिलचस्प बात यह रही कि राज्य में लागू निकाय चुनाव की आचार संहिता के कारण फैसलों की आधिकारिक ब्रीफिंग तो नहीं हुई, लेकिन अंदरखाने से बड़ी खबरें निकलकर सामने आई हैं।
खिलाड़ियों के लिए सम्मान राशि में बड़ा बदलाव
झारखंड के खिलाड़ियों के लिए यह कैबिनेट बैठक खुशियां लेकर आई है। सरकार ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों की पेंशन योजना को रिस्ट्रक्चर (पुनर्गठित) किया है। अब नई नीति के तहत:
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राजीव गांधी खेल रत्न (अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न) और ओलंपिक पदक विजेताओं को हर महीने 20,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलेगी।
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वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स और सैफ गेम्स के विजेताओं को क्रमानुसार 16,000 रुपये तक की पेंशन दी जाएगी।
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नेशनल गेम्स के पदक विजेताओं को भी नहीं भुलाया गया है, उन्हें सरकार हर महीने 5,000 रुपये पेंशन के तौर पर देगी।
यह कदम झारखंड को स्पोर्ट्स हब बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
JPSC उम्र सीमा पर फंसा पेंच
14वीं जेपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए खबर थोड़ी निराशाजनक रही। कार्मिक विभाग ने उम्र सीमा में छूट का प्रस्ताव तो रखा था, लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश पर इसे स्थगित कर दिया गया। सूत्रों का कहना है कि सरकार अभी इस बात पर एकमत नहीं है कि छूट कितने सालों की दी जाए। छात्र जहां कट-ऑफ डेट अगस्त 2018 की मांग कर रहे हैं, वहीं पिछली परीक्षाओं (11वीं-13वीं) में यह अगस्त 2017 थी। सरकार अब इस पर नए सिरे से विचार करेगी कि क्या छात्रों की मांग पूरी की जा सकती है।
विश्वविद्यालय और विभागों को मिली सौगात
कैबिनेट ने शिक्षा और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में भी बड़े फैसले लिए हैं:
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पदों का पुनर्गठन: सिद्धो-कान्हो, कोल्हान और विनोबा भावे विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के पदों को रिस्ट्रक्चर किया गया है।
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नई नियुक्तियों का रास्ता: जल संसाधन विभाग के तृतीय और चतुर्थ वर्गीय कर्मियों के 2727 पदों को कार्मिक विभाग को प्रत्यर्पित कर दिया गया है, जिससे नई नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा।
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तकनीकी सहायता: पेयजल और जल संसाधन विभाग में एकाउंटिंग और वर्क्स मैनेजमेंट के लिए सेवा देने वाली कंपनी सी-डैक (C-DAC) का सेवा विस्तार मंजूर किया गया है।
कैबिनेट के इन फैसलों से साफ है कि सरकार एक तरफ खिलाड़ियों और कर्मचारियों को साध रही है, तो दूसरी तरफ जेपीएससी जैसे संवेदनशील मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।



