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हजारीबाग में ‘दारुल हिकमत लाइब्रेरी’ की स्थापना से शिक्षा को नई दिशा

हजारीबाग में एक नई और प्रेरणादायक शैक्षिक पहल के तहत ‘दारुल हिकमत लाइब्रेरी’ की स्थापना की गई है। पबरा रोड स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी (बारी कॉलोनी), गैलेक्सी स्कूल के पास स्थापित यह पुस्तकालय क्षेत्र में शिक्षा, शोध और वैचारिक विकास के लिए एक मजबूत मंच

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हजारीबाग में एक नई और प्रेरणादायक शैक्षिक पहल के तहत ‘दारुल हिकमत लाइब्रेरी’ की स्थापना की गई है। पबरा रोड स्थित मौलाना आजाद कॉलोनी (बारी कॉलोनी), गैलेक्सी स्कूल के पास स्थापित यह पुस्तकालय क्षेत्र में शिक्षा, शोध और वैचारिक विकास के लिए एक मजबूत मंच के रूप में उभर रहा है। इस महत्वपूर्ण संस्थान की नींव प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और चिंतक डॉ. मौलाना मोहम्मद जकीउल्लाह मिस्बाही ने अपने व्यक्तिगत प्रयास से रखी है।

डॉ. मिस्बाही ने बताया कि इस पुस्तकालय का उद्देश्य केवल किताबें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि एक ऐसा सकारात्मक शैक्षिक वातावरण तैयार करना है, जहाँ धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का समन्वय हो, और नई पीढ़ी को अध्ययन और शोध की ओर प्रोत्साहित किया जा सके। यह स्थान छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी है।

‘दारुल हिकमत लाइब्रेरी’ में स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर की पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी किताबें, इस्लामी अध्ययन, धार्मिक ग्रंथ, सामाजिक मुद्दे, समकालीन राजनीतिक विषयों और शोध से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई है। इसके अतिरिक्त, एक व्यवस्थित और शांत अध्ययन कक्ष की भी सुविधा दी गई है, जहाँ भविष्य में शैक्षिक, वैचारिक और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

यह पुस्तकालय केवल ज्ञान का भंडार नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन की शुरुआत है, जो नई पीढ़ी को नैतिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से आगे बढ़ रहा है। डॉ. मिस्बाही ने यह भी कहा कि समय और जरूरत के अनुसार लाइब्रेरी का और विस्तार किया जाएगा।

इस स्थापना पर शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने प्रसन्नता जताई है। रांची विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद रिजवान अली, डॉ. गुलाम समदानी (गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह), डॉ. मोहम्मद हैदर अली (जे.एन. कॉलेज, धुर्वा, रांची), मोहम्मद इफ्तिखार आलम (शोध छात्र, जामिआ मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली), सज्जाद आलम (एडवोकेट, लखनऊ हाईकोर्ट लखनऊ), डॉ. मोहम्मद हाशिम रजा (सहायक प्रोफेसर, पटना विश्वविद्यालय, पटना), डॉ. इमरान इराकी (हजारीबाग) सहित कई शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने डॉ. मिस्बाही को बधाई देते हुए इस प्रयास की सराहना की है।

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