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नेतन्याहू ने कतर से मांगी माफी, तीसरी बार मुस्लिम देशों के सामने झुके!

World News: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर मुस्लिम देशों के दबाव में झुक गए। गाजा पर लगातार हो रहे हमलों के बीच हाल ही में कतर पर हुए मिसाइल हमले के बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी। यह पिछले 30 सालों में तीसरी

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World News: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर मुस्लिम देशों के दबाव में झुक गए। गाजा पर लगातार हो रहे हमलों के बीच हाल ही में कतर पर हुए मिसाइल हमले के बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी। यह पिछले 30 सालों में तीसरी बार है जब नेतन्याहू को किसी मुस्लिम देश से औपचारिक माफी मांगनी पड़ी। इससे पहले वे जॉर्डन और तुर्किये के सामने भी दबाव में आकर माफी जता चुके हैं।

कतर से माफी, मुस्लिम देशों का बढ़ा दबाव

9 सितंबर को कतर की राजधानी दोहा में इजराइली एयरफोर्स ने रेड सी से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल के जरिए एक रिहाइशी इमारत को निशाना बनाया। इमारत में उस समय हमास के नेता सीजफायर पर बातचीत कर रहे थे। हमले में पांच हमास अधिकारी और कतर सेना का एक जवान मारा गया। इस घटना ने मुस्लिम देशों में भारी आक्रोश फैला दिया। पांच दिन बाद दोहा में 50 से अधिक मुस्लिम देशों के नेता इकट्ठा हुए और इजराइल की कड़ी निंदा की। दबाव इतना बढ़ा कि नेतन्याहू ने मात्र 20 दिन बाद व्हाइट हाउस से कतर के प्रधानमंत्री को फोन कर माफी मांगी और भरोसा दिया कि भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराई जाएगी।

1997: जॉर्डन से माफी

यह पहली बार नहीं है जब नेतन्याहू झुके हों। 1997 में मोसाद एजेंट्स ने जॉर्डन में हमास नेता खालिद मेशाल को जहर दे दिया था। योजना थी कि 48 घंटे बाद उनकी मौत हो जाएगी, लेकिन एजेंट पकड़े गए और मेशाल की हालत बिगड़ गई। जॉर्डन के राजा हुसैन ने इजराइल को धमकी दी कि एंटीडोट न मिलने पर एजेंट्स को फांसी पर लटका देंगे। अमेरिका के दबाव और संकट से बचने के लिए मोसाद प्रमुख डैनी यातोम खुद एंटीडोट लेकर अम्मान पहुँचे और मेशाल की जान बचाई। इसके बाद नेतन्याहू को न सिर्फ माफी मांगनी पड़ी बल्कि कई फिलिस्तीनी कैदियों को भी छोड़ना पड़ा।

2010: तुर्किये से माफी

2010 में गाजा नाकेबंदी के खिलाफ मानवीय मदद लेकर तुर्किये का जहाज ‘एमवी मावी मरमरा’ गाजा की ओर जा रहा था। गाजा तट से 125 किमी पहले इजराइल ने हमला किया, जिसमें तुर्किये के 9 लोग मारे गए और 7 इजराइली सैनिक भी हताहत हुए। इस घटना ने दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ दिया। तीन साल तक तनाव के बाद मार्च 2013 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की मध्यस्थता से नेतन्याहू ने तुर्की पीएम एर्दोआन को फोन कर औपचारिक माफी मांगी और मृतकों के परिवारों को 20 मिलियन डॉलर का मुआवजा दिया।

कूटनीतिक दबाव के आगे इजराइल

कतर, जॉर्डन और तुर्किये से माफी की ये घटनाएं साफ करती हैं कि सैन्य शक्ति में मजबूत होने के बावजूद इजराइल को कूटनीतिक दबाव और मुस्लिम देशों की एकजुटता के आगे झुकना पड़ता है। नेतन्याहू की तीसरी माफी ने एक बार फिर इजराइल की विदेश नीति और रणनीतियों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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