रांची: राजधानी के निजी स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि और किताबों की बिक्री को लेकर आने वाली शिकायतों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में मोरहाबादी स्थित आर्यभट्ट सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में जिले के CBSE, ICSE और JAC बोर्ड से संबद्ध निजी स्कूलों के प्राचार्यों और प्रतिनिधियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि अभिभावकों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अभिभावक-शिक्षक संघ अनिवार्य, केवल 13 स्कूलों ने दी जानकारी

बैठक के दौरान उपायुक्त ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जिले के सैकड़ों स्कूलों में से अब तक केवल 13 स्कूलों ने ही अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) के गठन की सूचना दी है। उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अगले 3 दिनों के भीतर सभी स्कूलों को अनिवार्य रूप से PTA का गठन कर इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को हार्ड कॉपी और ईमेल के जरिए देनी होगी। साथ ही, इसकी जानकारी स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर भी सार्वजनिक करनी होगी।

किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर ‘कमीशनखोरी’ पर रोक

अक्सर देखा जाता है कि स्कूल किसी खास दुकान या वेंडर से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाते हैं। इस पर रोक लगाते हुए डीसी ने आदेश दिया कि स्कूल परिसर में किसी भी तरह की सामग्री का विक्रय नहीं होगा। अभिभावक खुले बाजार से सामान खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। स्कूल केवल NCERT की किताबें ही चलाएंगे और 5 साल से पहले यूनिफॉर्म का डिजाइन नहीं बदला जा सकेगा।

फीस वृद्धि के लिए कड़े नियम : 10% की सीमा तय

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम 2017 का हवाला देते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया कि:

  • स्कूल अपनी स्तर पर केवल 10% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं।

  • 10% से अधिक की वृद्धि के लिए जिला स्तरीय समिति की अनुमति अनिवार्य होगी।

  • एक बार फीस बढ़ने के बाद वह कम से कम 2 वर्षों तक प्रभावी रहेगी।

  • सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगली कक्षा में जाने पर छात्रों से पुनर्नामांकन (Re-admission) शुल्क नहीं लिया जा सकेगा।

परीक्षा से वंचित किया तो होगी जेल

बैठक में यह भी साफ किया गया कि फीस बकाया होने या किसी अन्य कारण से किसी भी छात्र को वार्षिक परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जा सकता। ऐसा करना शिक्षा के अधिकार (RTE) और बाल अधिकार अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा, जिसके लिए स्कूल प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जुर्माने का प्रावधान और अनुपस्थित स्कूलों पर गाज

बैठक में ‘अबुआ साथी पोर्टल’ पर मिली शिकायतों पर भी चर्चा हुई। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर ₹50,000 से लेकर ₹2,50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में स्कूल की मान्यता (NOC) भी रद्द की जा सकती है।

बता दें कि बैठक में कुल 272 स्कूलों में से केवल 192 ही उपस्थित हुए। अनुपस्थित रहने वाले 80 स्कूलों को उपायुक्त ने ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी करने का आदेश दिया है।

प्रशासन के इस कड़े रुख से जहां स्कूल प्रबंधन में हड़कंप है, वहीं अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। डीसी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा को व्यापार बनाने वालों के खिलाफ जिला प्रशासन की जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी।

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