रांची: झारखंड में वामपंथी उग्रवाद और नक्सलियों के बीच खौफ का दूसरा नाम बन चुकी विशेष इकाई ‘झारखंड जगुआर’ ने गुरुवार को अपना 18वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। रांची स्थित जगुआर मुख्यालय (टेंडर ग्राम) में आयोजित इस समारोह में राज्य की पहली महिला डीजीपी तदाशा मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने न केवल जवानों के शौर्य को सलाम किया, बल्कि उनके कल्याण के लिए एक बड़ी घोषणा भी की।

जवानों के लिए समर्पित अस्पताल की घोषणा

डीजीपी तदाशा मिश्रा ने जगुआर के जवानों और उनके परिजनों को संबोधित करते हुए कैंपस में ही 10 बेड का अस्पताल खोलने का ऐलान किया। आईजी अनूप बिरथरे के सुझाव पर यह निर्णय लिया गया है। डीजीपी ने कहा कि इतने बड़े और चुनौतीपूर्ण कैंपस में डॉक्टरों की चौबीसों घंटे उपलब्धता अनिवार्य है। जल्द ही इस अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और डॉक्टरों की टीम की तैनाती की जाएगी।

18 सालों का गौरवशाली सफर: आंकड़ों में उपलब्धि

आईजी अनूप बिरथरे ने बल की 18 साल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा साझा किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2008 में गठन के बाद से अब तक:

  • झारखंड जगुआर ने कुल 114 मुठभेड़ों में भाग लिया है।

  • मुठभेड़ में 50 से अधिक खूंखार नक्सलियों को मार गिराया गया है।

  • 350 से अधिक उग्रवादियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

  • जवानों ने 4500 से अधिक हथियार और 3000 से ज्यादा आईईडी (IED) बरामद कर जंगली रास्तों को सुरक्षित बनाया है।

  • वर्ष 2025 में ही जगुआर ने अकेले 7 उग्रवादियों को ढेर किया और भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद किए।

शहीदों को नमन और लाइव डेमो

कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। आईजी ने उन 24 वीर जवानों को याद किया जिन्होंने राज्य की शांति के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। समारोह का मुख्य आकर्षण जवानों द्वारा किया गया लाइव डेमो रहा। इसमें नक्सलियों के खिलाफ जंगल में होने वाले एनकाउंटर, आईईडी सर्च और बीहड़ों में ऑपरेशन की चुनौतियों का जीवंत प्रदर्शन किया गया, जिसे देख उपस्थित लोग दंग रह गए।

अंत में डीजीपी ने कहा कि चाईबासा जैसे अंतिम नक्सल प्रभावित गढ़ों में भी जल्द ही पूर्ण शांति स्थापित कर दी जाएगी। वर्तमान सरकार के सहयोग से पुलिस का मनोबल बढ़ा है और तकनीक व प्रशिक्षण के बल पर झारखंड जल्द ही नक्सल मुक्त होगा।

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