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अलविदा नाना पाटेकर: 75 की उम्र में निधन, बिहार से जुड़ी हैं उनकी खास यादें

अलविदा नाना पाटेकर: 75 की उम्र में निधन से पसरा सन्नाटा, बिहार के खेतों से लेकर सुशांत के घर तक जुड़ी थीं गहरी यादें

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Patna: भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत हो गया है। अपनी दमदार आवाज, तीखे संवाद और बेजोड़ अभिनय से दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया है। गुरुवार की सुबह गोवा स्थित उनके आवास पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और वह अचेत अवस्था में मिले। परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उनकी सांसें वापस लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे कामयाब नहीं हो सके। डॉक्टरों के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा) उनके निधन की मुख्य वजह बना।

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नाना पाटेकर के जाने की खबर जैसे ही देश और फिल्म जगत तक पहुंची, चारों तरफ शोक की लहर दौड़ गई। करीब पांच दशक लंबे अपने करियर में उन्होंने गंभीर, संवेदनशील, खलनायक से लेकर विशुद्ध हास्य तक, हर तरह के किरदार को पर्दे पर अमर कर दिया। लेकिन उनके निधन के बाद बिहार के दर्शकों और उनके चाहने वालों की आंखें थोड़ी ज्यादा नम हैं, क्योंकि नाना पाटेकर का इस माटी से एक बहुत ही गहरा और अनोखा रिश्ता रहा था।

‘अपहरण’ फिल्म से जुड़ा बिहार का सियासी पन्ना

बिहार से नाना पाटेकर का नाता यूं तो कई स्तरों पर रहा, लेकिन निर्देशक प्रकाश झा की साल 2005 में आई फिल्म ‘अपहरण’ ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया। इस फिल्म में उन्होंने अजय देवगन के साथ मिलकर पर्दे पर ऐसा तड़का लगाया कि दर्शक दंग रह गए।

यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं थी, बल्कि उस दौर के बिहार के कुख्यात अपहरण उद्योग, राजनीति और अपराध के गठजोड़ की कड़वी सच्चाई को बड़े पर्दे पर बेबाकी से पेश करती थी। फिल्म में नाना पाटेकर का किरदार और उनके बोले गए एक-एक संवाद आज भी लोगों के जुबान पर हैं। बिहार की सियासत और सामाजिक ताने-बाने को राष्ट्रीय फलक पर इतनी गहराई से दिखाने वाली फिल्मों में ‘अपहरण’ का नाम सबसे ऊपर लिया जाता है, और इसका बहुत बड़ा श्रेय नाना पाटेकर की मंचीय और फिल्मी ताकत को जाता है।

जब बिहार आकर खेतों में हल चलाया और जवानों का हौसला बढ़ाया

नाना पाटेकर की शख्सियत सिर्फ पर्दे के परदे तक सीमित नहीं थी। वह असल जिंदगी में भी जमीन से जुड़े और बेहद संवेदनशील इंसान थे। साल 2020 में वह एक निजी दौरे पर बिहार आए थे। इस दौरान उनका जो रूप बिहार के लोगों ने देखा, वह हमेशा के लिए यादगार बन गया।

उन्होंने मोकामा में सीआरपीएफ (CRPF) के कैंप का दौरा किया और वहां तैनात देश के वीर जवानों से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। इसके बाद वह आसपास के ग्रामीण इलाकों में पहुंचे, जहां उनका एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। किसानों के बीच बैठकर उन्होंने न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि खेत में जाकर बैलों के साथ खुद हल भी चलाया। इसके अलावा उन्होंने खादी ग्रामोद्योग केंद्र का भी दौरा किया था।

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इसी बिहार दौरे के दौरान उन्होंने एक ऐसा काम किया जिसने हर संवेदनशील इंसान का दिल जीत लिया। वह सीधे पटना के राजीव नगर स्थित दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के घर पहुंचे। वहां उन्होंने सुशांत के पिता केके सिंह से मुलाकात की, उन्हें ढांढस बंधाया और सुशांत की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर अपनी श्रद्धांजलि दी। मोकामा के बाद उन्होंने भोजपुर के कोइलवर में भी सीआरपीएफ जवानों से मुलाकात की थी। उनकी यह यात्रा आज भी लोगों को याद है, जब एक बड़ा स्टार आम लोगों के बीच पूरी तरह से घुलमिल गया था।

सिल्वर स्क्रीन पर क्रांतिवीर से लेकर वेलकम तक का सफर

नाना पाटेकर के अभिनय का दायरा बहुत बड़ा था। उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक शानदार फिल्में दीं। ‘परिंदा’ का खूंखार गैंगस्टर हो, ‘क्रांतिवीर’ का बागी प्रताप नारायण तिलक, ‘अग्निसाक्षी’ का साइको पति, ‘अब तक छप्पन’ का एनकाउंटर स्पेशलिस्ट साधु अगटे या फिर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम’ का डॉन उदय शेट्टी… हर किरदार में उन्होंने अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि दूसरा कोई उसकी कल्पना भी नहीं कर सकता।

अपनी शानदार अभिनय शैली के लिए उन्हें तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (National Film Award) से नवाजा गया और साल 2013 में सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था।

बिहार की यादों में हमेशा जिंदा रहेंगे नाना

आज जब नाना पाटेकर इस दुनिया को छोड़कर जा चुके हैं, तो बिहार के लोगों के लिए उनकी यादें सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं हैं। वह यादें फल्गु और गंगा की इस धरती के उन पन्नों से जुड़ी हैं जहां उन्होंने जवानों के साथ वक्त बिताया, किसानों के साथ मिट्टी में हाथ बांटे और एक दुखी पिता के आंसू पोंछे। नाना पाटेकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार और उनकी मानवीय शख्सियत हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।

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