Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के मुखिया व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की मुलाकात ने राज्य के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। जयंत चौधरी ने शमी के साथ अपनी मुलाकात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसके बाद से शमी के चुनावी राजनीति में उतरने के कयास लगने लगे हैं। हालांकि, न तो शमी की तरफ से और न ही आरएलडी की ओर से किसी तरह की चुनावी उम्मीदवारी या पार्टी में शामिल होने का औपचारिक ऐलान किया गया है।
लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर हैं शमी
मोहम्मद शमी काफी समय से भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम से बाहर चल रहे हैं। उन्होंने भारत के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 9 मार्च 2025 को न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहने के बावजूद राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी की राह आसान नहीं दिखी है। क्रिकेट मैदान से इस दूरी के बीच जयंत चौधरी के साथ उनकी बैठक ने राजनीतिक विश्लेषकों को उनके भावी कदमों पर नजर टिकाने पर मजबूर कर दिया है।
भाई हसीब के नाम पर भी लग रहे हैं कयास
सियासी गलियारों में केवल मोहम्मद शमी ही नहीं, बल्कि उनके बड़े भाई हसीब के नाम की भी चर्चा चल रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि खेल या अन्य व्यस्तताओं के चलते शमी खुद सीधे तौर पर चुनावी मैदान में नहीं उतरते हैं, तो उनके परिवार से कोई अन्य सदस्य उम्मीदवार के रूप में सामने आ सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शमी के परिवार की छवि और स्थानीय पकड़ को देखते हुए इस विकल्प को भी खारिज नहीं किया जा रहा है।
अमरोहा का सामाजिक ताना-बाना और सियासी समीकरण
इस पूरी हलचल के केंद्र में अमरोहा का इलाका है, जहां शमी के परिवार का गहरा प्रभाव माना जाता है। क्षेत्र में मुस्लिम आबादी खासी संख्या में है और शमी का परिवार तुर्क बिरादरी से ताल्लुक रखता है। अमरोहा लंबे समय से समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ रहा है। ऐसे में आरएलडी प्रमुख से शमी की यह बैठक राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, हालांकि जब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं होती, इसे संभावित राजनीतिक हलचल के तौर पर ही देखा जा रहा है।




