पटना। बिहार में बेहतर ग्रामीण सड़क और पुल बनने से गांव की महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। अब महिलाओं के लिए स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार के स्थानों तक पहुंचना आसान हो गया है।
भागलपुर की रहने वाली और किशनगंज में शिक्षिका रोजी कुमारी बताती हैं कि नौकरी के बाद जब उनका ट्रांसफर गांव में हुआ, तो उन्हें वहां की सड़कों और सुविधाओं को लेकर चिंता थी। लेकिन गांव पहुंचने के बाद उनकी सोच बदल गई।
रोजी कहती हैं, “अब गांव और शहर की सड़कों और सुविधाओं में ज्यादा अंतर नहीं दिखता। अच्छी सड़कें महिलाओं के लिए बहुत जरूरी हैं। इससे उन्हें आगे बढ़ने के ज्यादा मौके मिलते हैं।”
महिलाओं के लिए आसान हुई आवाजाही
पक्की ग्रामीण सड़कों के कारण महिलाओं और लड़कियों का घर से बाहर निकलना आसान हुआ है। छात्राओं के लिए स्कूल पहुंचना आसान हुआ है। वहीं गर्भवती महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र तक समय पर पहुंचने में मदद मिल रही है। बाजार, बैंक और रोजगार से जुड़े स्थानों तक पहुंच आसान होने से ग्रामीण महिलाओं के लिए काम और कमाई के अवसर भी बढ़े हैं।
इंदिरा गांधी विकास अनुसंधान संस्थान की अर्थशास्त्र की सहायक प्रोफेसर भारती नंदवानी के अनुसार, बेहतर ग्रामीण सड़कों से महिलाओं की आवाजाही की परेशानी कम हुई है। इससे लड़कियों की पढ़ाई में भागीदारी बढ़ी है और महिलाओं की स्वतंत्रता मजबूत हुई है। हालांकि, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार बढ़ाने के लिए अभी और प्रयास की जरूरत है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार की ग्रामीण सड़कें देश में बेहतर उदाहरण पेश करती हैं।
महिलाओं ने बताई बदलाव की कहानी
राधा देवी बताती हैं, “पहले घर से बाहर निकलना मुश्किल था। अब गांव से बाहर हमारी छोटी-सी दुकान है। सड़क अच्छी होने से गाड़ी से करीब आधे घंटे में पहुंच जाते हैं। इससे हमें बहुत फायदा हुआ है।”
रिंकू देवी, किशनगंज कहती हैं, “पहले शहर जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था और पति के बिना जाना मुश्किल था। पुल बनने के बाद अब मैं अकेले भी घर से बाहर जा सकती हूं। इससे महिलाओं को काफी सुविधा मिली है।”
साक्षी राज, नदमा गांव के अनुसार, “अब छात्राओं और शिक्षिकाओं के लिए स्कूल जाना और महिलाओं के लिए बाजार जाना आसान हो गया है। सड़कें बेहतर होने के साथ महिलाओं की जिंदगी में भी बदलाव आ रहा है।”




