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सावधान! मन का भारीपन और सुस्ती है हार्मोनल लोचा, ऐसे पाएं निजात

Health News: क्या आपको भी अक्सर ऐसा महसूस होता है कि शरीर में जान नहीं बची? क्या छोटी-छोटी बातों पर आपका मूड खराब हो जाता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर चल रहा हार्मोनल

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Health News: क्या आपको भी अक्सर ऐसा महसूस होता है कि शरीर में जान नहीं बची? क्या छोटी-छोटी बातों पर आपका मूड खराब हो जाता है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह सिर्फ एक मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि शरीर के भीतर चल रहा हार्मोनल असंतुलन है। आयुर्वेद के अनुसार, जब थायरॉयड धीमा पड़ता है और तनाव बढ़ाने वाला ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन बढ़ता है, तो इंसान धीरे-धीरे डिप्रेशन और भारीपन का शिकार होने लगता है।

वात और तमोगुण: सुस्ती का असली कारण

आयुर्वेद में इस स्थिति को ‘वात’ दोष और ‘तमोगुण’ के असंतुलन से जोड़कर देखा जाता है। वात बढ़ने से नींद टूटती है और फोकस कम होता है, वहीं तमोगुण मन को भारी और थका हुआ बना देता है। जब हमारी पाचन अग्नि कमजोर होती है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे शरीर सुस्त और मन बोझिल महसूस करने लगता है। इसे ठीक करने के लिए केवल दवाएं नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव जरूरी है।

अश्वगंधा और ब्राह्मी: मन के लिए कुदरती टॉनिक

हार्मोन को संतुलित करने के लिए आयुर्वेद में कई शक्तिशाली जड़ी-बूटियां बताई गई हैं। ‘अश्वगंधा’ जहाँ तनाव को कम कर कोर्टिसोल को नियंत्रित करती है, वहीं ‘ब्राह्मी’ और ‘शंखपुष्पी’ मस्तिष्क को शांत कर फोकस बढ़ाती हैं। गहरी नींद के लिए ‘जटामांसी’ का सेवन रामबाण माना गया है। इसके अलावा, सुबह की धूप लेना, स्क्रीन टाइम कम करना और रात को पैरों के तलवों में तिल के तेल की मालिश करना मन को स्थिर करने में जादुई असर दिखाता है।

योग और सात्विक आहार से बढ़ेगा ‘ओज’

प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम और भ्रामरी सीधे हमारी नाड़ियों को शांत करते हैं। आहार में बादाम, घी, हल्दी वाला दूध और गुड़ शामिल करने से शरीर को ताकत मिलती है। कैफीन और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर आप अपनी खोई हुई ऊर्जा वापस पा सकते हैं। याद रखें, एक शांत मन और संतुलित हार्मोन ही स्वस्थ जीवन की असली कुंजी हैं।

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