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रांची: किसी भी मां की जान जाना हमें स्वीकार्य नहीं है। यह संजीदा बयान झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शनिवार को ‘राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में दिया। रांची में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य अब स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है।
स्वास्थ्य सेवाओं में नंबर-1 बनने की तैयारी
डॉ. अंसारी ने राज्य की महत्वाकांक्षी योजना को साझा करते हुए कहा कि झारखंड वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में तीसरे स्थान पर है, लेकिन हमारा लक्ष्य इसे देश में नंबर-1 बनाना है। इसके लिए जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे को न केवल सुधारा जा रहा है, बल्कि उसका विस्तार भी किया जा रहा है।
डिजिटल क्रांति: सहियाओं के हाथ में होगा ‘टैबलेट’
इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी घोषणा सहिया कार्यकर्ताओं के लिए रही। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि डिजिटल हेल्थ सिस्टम को सशक्त बनाने के लिए अगले एक महीने के भीतर राज्य की 42,000 सहिया कार्यकर्ताओं को टैबलेट दिए जाएंगे। इस कदम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की मॉनिटरिंग रीयल-टाइम में हो सकेगी और आंकड़ों के प्रबंधन में तेजी आएगी। अब गांव की अंतिम चौखट तक डॉक्टर और दवा की पहुंच सुनिश्चित करना आसान होगा।
बीमारियों पर ‘मेगा प्रहार’ और सामाजिक बदलाव
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सरकार जल्द ही राज्यभर में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और कुपोषण के खिलाफ ‘मेगा स्क्रीनिंग अभियान’ शुरू करेगी। मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि सुरक्षित मातृत्व केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं है; इसके लिए बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकना, किशोरियों की शिक्षा सुनिश्चित करना और एनीमिया पर नियंत्रण पाना अनिवार्य है।
विशेषज्ञों की राय और ममता वाहन का महत्व
कार्यक्रम में ‘ममता वाहन’ सेवा और सहियाओं के समर्पण की सराहना की गई। अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य की प्रगति का असली पैमाना वहां की MMR (मातृ मृत्यु दर) और IMR (शिशु मृत्यु दर) में गिरावट है। वहीं, यूनिसेफ की प्रतिनिधि पारुल शर्मा ने झारखंड के प्रयासों को सराहा और इसे मातृत्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘उभरता मॉडल’ करार दिया।
तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने ‘हाई रिस्क प्रेग्नेंसी’ (HRP) की पहचान पर जोर दिया, ताकि समय रहते मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सके। कुल मिलाकर, यह कार्यक्रम झारखंड के स्वास्थ्य भविष्य की एक सुनहरी और सुरक्षित तस्वीर पेश करता है।

