Mumbai: महाराष्ट्र में टीईटी (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, यह मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट काम कर रहा था। जांच एजेंसियों ने बिहार के समस्तीपुर निवासी विजेंद्र गुप्ता को इस नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड बताया है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा भेजी गई हैं।

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इधर, महाराष्ट्र सरकार ने परीक्षा रद्द होने से प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों को राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि स्थगित की गई टीईटी परीक्षा के लिए दोबारा आवेदन या पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार जल्द ही परीक्षा की नई तिथि घोषित करेगी।

25 साल से पेपर लीक नेटवर्क में शामिल होने का दावा

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अब तक गिरफ्तार तीनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान विजेंद्र गुप्ता का नाम सामने रखा है। जांच अधिकारियों का दावा है कि वह पिछले करीब 25 वर्षों से ओडिशा, मध्य प्रदेश, बिहार सहित कई राज्यों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों से जुड़ा रहा है।

भिवंडी की एक अदालत ने रविवार को इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों राजीव शाह (45), आकाश कुमार उर्फ सूरज सिंह (30) और धीरज सिंह (28) को 6 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस इनसे लगातार पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के सोनीपत निवासी कपिल दहिया की भी इस मामले में वांछित आरोपी के रूप में पहचान की गई है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

QR कोड से तलाशा जा रहा लीक का स्रोत

जांच एजेंसियां महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद और शिक्षा विभाग की मदद से प्रत्येक प्रश्न-पत्र पर छपे यूनिक क्यूआर कोड के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि प्रश्नपत्र सबसे पहले कहां से लीक हुआ।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद को 28 जून को आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षा निर्धारित तिथि से एक दिन पहले रद्द करनी पड़ी थी। इस फैसले से राज्यभर के 6 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए।

इस घटना के बाद शिक्षक संगठनों ने एक बार फिर वरिष्ठ शिक्षकों के प्रमोशन के लिए टीईटी को अनिवार्य बनाने वाली नीति की समीक्षा करने की मांग उठाई है।

सरकार ने अभ्यर्थियों को दिया भरोसा

स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि राज्य सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने अभ्यर्थियों को आश्वस्त किया कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसके लिए किसी भी उम्मीदवार को दोबारा आवेदन करने या परीक्षा शुल्क जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने बताया कि टीईटी परीक्षा राज्यभर के 1,028 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होनी थी। पेपर लीक की जानकारी मिलने के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया ताकि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

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दादा भुसे ने कहा कि इस मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि परीक्षा की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी, ताकि अभ्यर्थियों को अधिक इंतजार न करना पड़े।

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