Nishio, (Japan): एशियन गेम्स 2026 में भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने इतिहास रचते हुए महिलाओं के 75 किग्रा भारवर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को खेले गए खिताबी मुकाबले में लवलीना ने चीनी मुक्केबाज बाओ जियाई को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले (Unanimous Decision) से मात देकर तिरंगा लहराया। यह मौजूदा एशियन गेम्स में भारत का कुल 12वां गोल्ड मेडल है। अपने 29वें जन्मदिन के मौके पर रिंग में उतरीं लवलीना ने इस ऐतिहासिक जीत के साथ अपने जन्मदिन को हमेशा के लिए यादगार बना दिया है।
5-0 से चीनी मुक्केबाज को मात: रिंग में आक्रामक पलटवार
फाइनल मुकाबले में चीनी मुक्केबाज बाओ जियाई ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन लवलीना ने बेहतरीन धैर्य और रणनीतिक समझ का परिचय दिया। शुरुआती राउंड में धीमी शुरुआत के बाद लवलीना ने सही समय का इंतजार किया और काउंटर अटैक के जरिए सटीक पंच जड़े। जब बाओ ने दबाव बनाने की कोशिश की, तो लवलीना ने चतुराई से क्लिंच तकनीक का सहारा लिया और फिर दूरी बनाकर जोरदार जैब और हुक्स लगाए। जजों ने एकमत होकर पांचों कार्डों पर भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में 5-0 से फैसला सुनाया।
मैरी कॉम के क्लब में शामिल: रचा नया कीर्तिमान
इस स्वर्णिम पंच के साथ लवलीना बोरगोहेन एशियन गेम्स के इतिहास में मुक्केबाजी का गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की दूसरी महिला बॉक्सर बन गई हैं। उनसे पहले यह ऐतिहासिक कारनामा दिग्गज मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम ने 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में किया था। इसके साथ ही लवलीना एशियन गेम्स के इतिहास में गोल्ड और सिल्वर दोनों मेडल जीतने वाली देश की पहली और एकमात्र महिला मुक्केबाज भी बन गई हैं। इससे पहले मैरी कॉम ने 2010 में ब्रॉन्ज और 2014 में गोल्ड मेडल जीता था।
29वें जन्मदिन पर मिला सबसे अनमोल तोहफा: सिल्वर का बदला पूरा
पिछली बार एशियन गेम्स के फाइनल में लवलीना को मामूली अंतर से हारकर सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। इस बार उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन से सीखते हुए कोई चूक नहीं की और पदक का रंग बदलकर सोने में तब्दील कर दिया। सेमीफाइनल में कजाखस्तान की मजबूत बॉक्सर को पटखनी देने के बाद फाइनल में चीन की चुनौती को ध्वस्त करना उनके करियर के सबसे बड़े मुकामों में से एक है। 2 अक्टूबर को अपने 29वें जन्मदिन पर इस जीत ने उनके खेल जीवन में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।




