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Lohardaga News: उर्सूलाइन कांवेंट स्कूल प्रबंधन ने छात्राओं के नामांकन, फीस और छात्रवृत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया है। विद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि नैंसी प्रजापति और शैली प्रजापति नाम की छात्राओं का नाम कभी भी फीस बकाया होने के कारण नहीं काटा गया।
ई-विद्यावाहिनी और यू-डाइस पोर्टल में दर्ज है नाम
प्रबंधन ने प्रमाण देते हुए बताया कि दोनों छात्राओं का नाम कक्षा आठ एवं नौ की उपस्थिति पंजी के साथ-साथ सरकारी पोर्टल यू-डाइस और ई-विद्यावाहिनी में भी दर्ज है। उनका पेन (PEN) संख्या भी अंकित है, जो यह साबित करता है कि उनका नामांकन पूरी तरह वैध है। छात्रवृत्ति के आरोपों पर स्कूल ने कहा कि नामांकन के समय अभिभावकों ने जाति प्रमाण पत्र और बैंक विवरण उपलब्ध नहीं कराए थे, जिसके कारण आवेदन नहीं हो सका।
समझौते और शपथ पत्र के बावजूद विवाद
प्रबंधन के अनुसार, पिछले साल प्रशासन की मौजूदगी में हुए समझौते के तहत 11 जुलाई 2024 को छात्राओं का नामांकन किया गया था। तब अभिभावकों ने शपथ पत्र देकर विद्यालय के नियमों के पालन और समय पर फीस भुगतान की सहमति दी थी। इसके बावजूद, छात्राएं 27 मार्च 2025 से लगातार अनुपस्थित चल रही हैं।
मदद का हाथ: “असमर्थ हैं तो चैरिटी से देंगे फीस”
21 जनवरी 2026 को समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में प्रधानाध्यापिका सिस्टर अंसरिता ने दो टूक कहा कि यदि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है, तो चैरिटी के माध्यम से फीस वहन करने पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी साफ किया कि अल्पसंख्यक विद्यालय की नियमावली और फीस संरचना हमेशा सूचना पट और स्कूल डायरी में प्रदर्शित रहती है।
प्रशासन से अपील: शैक्षणिक माहौल न हो प्रभावित
प्रधानाध्यापिका ने जिला प्रशासन और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील की है कि इस विवाद का शीघ्र समाधान निकाला जाए। उन्होंने कहा कि उर्सूलाइन एक प्रतिष्ठित संस्थान है और इस तरह के आधारहीन विवादों से छात्राओं के सर्वांगीण विकास और विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण पर बुरा असर पड़ता है।

