Social News: हवाई यात्रा हमेशा से आरामदायक मानी जाती है, लेकिन बढ़ते लगेज चार्ज यात्रियों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। इसी वजह से आजकल एक नया ट्रेंड चर्चा में है, जिसका नाम है “फ्लाइंग नैकेड”। नाम सुनकर भले ही अजीब लगे, लेकिन इसका मतलब बिना कपड़ों के सफर करना बिल्कुल नहीं है।

असल में, इस ट्रेंड के तहत लोग फ्लाइट में भारी बैग ले जाने के बजाय दो तरीके अपनाते हैं। पहला, जरूरी सामान और कपड़े कई परतों में पहन लेना और दूसरा, सामान को फ्लाइट में ले जाने के बजाय डाक से गंतव्य तक भिजवा देना। इससे वे एयरलाइंस की महंगी लगेज फीस से बच जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने इस तरीके से लगभग 1,000 डॉलर (करीब 88,000 रुपये) बचाए, वहीं एक शिक्षक ने करीब 600 डॉलर बचाए। यह साफ दिखाता है कि लगेज चार्ज अब यात्रियों के लिए बड़ा बोझ बन चुका है।

युवा पीढ़ी, खासकर जनरेशन Z और मिलेनियल्स, इस ट्रेंड को तेजी से अपना रहे हैं। उनका मानना है कि एयरलाइंस जानबूझकर भ्रामक लगेज पॉलिसी बनाकर ज्यादा शुल्क वसूलती हैं। ऐसे में यह ट्रेंड न सिर्फ जेब बचाता है, बल्कि यात्रा को ज्यादा आसान भी बनाता है।

इस तरीके के कई फायदे हैं। एयरपोर्ट पर आपको चेक-इन काउंटर पर लंबी लाइन में खड़ा नहीं होना पड़ता। सीधे सिक्योरिटी चेक कराकर फ्लाइट में चढ़ सकते हैं। लैंडिंग के बाद भी बैगेज क्लेम पर इंतजार करने की झंझट नहीं रहती। कम सामान होने से यात्री खुद को ज्यादा फ्री और रिलैक्स महसूस करते हैं।

हालांकि, यह ट्रेंड हर किसी के लिए नहीं है। जो लोग कम कपड़ों और सीमित सामान के साथ सफर कर सकते हैं, वही इसे अपना पाते हैं। लेकिन मानना पड़ेगा कि फ्लाइंग नैकेड यात्रा का एक नया, किफायती और आरामदायक तरीका बन चुका है।

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