Koderma: जिले के सतगावां प्रखंड अंतर्गत खवासडीह बिरहोर टोला में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। यहां 50 वर्षीय छोटका सोमर बिरहोर की बीमारी के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों के अनुसार, छोटका सोमर बिरहोर लंबे समय से पीलिया (जॉन्डिस) से पीड़ित थे। उनका उपचार स्थानीय स्तर पर जड़ी-बूटी के माध्यम से किया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि रविवार को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उनका निधन हो गया।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग पर लगाए आरोप
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि बिरहोर टोला में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई स्वास्थ्यकर्मी या चिकित्सक उनकी सुध लेने नहीं पहुंचा। उनका कहना है कि यदि समय पर चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध होती, तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, इन आरोपों पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस समाचार तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आदिम जनजाति क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल
परिजनों के अनुसार, छोटका सोमर बिरहोर आदिम जनजाति परिवार से थे। जागरूकता की कमी के कारण उनका इलाज आधुनिक चिकित्सा पद्धति के बजाय स्थानीय स्तर पर किया जा रहा था। घटना के बाद ग्रामीणों ने आदिम जनजातियों के स्वास्थ्य और विकास को लेकर सरकारी दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से खवासडीह बिरहोर टोला जैसे सुदूर इलाकों में नियमित स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने और समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में इलाज के अभाव में होने वाली ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।




