अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
India News: बांग्लादेश की राजनीति का एक युग आज हमेशा के लिए शांत हो गया। ढाका की हवाओं में आज सिसकियां हैं और सड़कों पर जनसैलाब। मौका है बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और ‘देशनेत्री’ बेगम खालिदा जिया की अंतिम विदाई का। इस ऐतिहासिक और गमगीन मौके पर भारत ने अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए एक बड़ा कूटनीतिक संदेश भी दिया है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर आज सुबह विशेष विमान से ढाका पहुंचे। उनके वहां पहुंचने का मकसद सिर्फ एक औपचारिक शोक सभा नहीं, बल्कि पड़ोसी देश के साथ रिश्तों की नई डोर को मजबूती देना भी था। जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान से मुलाकात की। इस मुलाकात की सबसे खास बात रही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह शोक संदेश, जिसे जयशंकर ने व्यक्तिगत रूप से तारिक रहमान को सौंपा।
इस खबर को भी पढ़ें : अलविदा ‘आयरन लेडी’: बांग्लादेश की पहली महिला PM खालिदा जिया नहीं रहीं
ढाका के गुलशन एवेन्यू से जब खालिदा जिया का पार्थिव शरीर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटा हुआ फ्रीजर-वैन में निकला, तो सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद हजारों लोगों की भीड़ बेकाबू नजर आई। सेना, पुलिस और आरएबी (RAB) के जवान तैनात थे, लेकिन समर्थकों का जोश और दुख सीमाओं को लांघ रहा था।
मानिक मिया एवेन्यू में दोपहर 2 बजे की नमाज-ए-जनाजा के लिए तिल रखने की जगह नहीं बची है। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज सादिक और नेपाल के विदेश मंत्री बाला नंद शर्मा भी इस राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे हैं। भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए संकेत दिया कि भारत, फरवरी 2026 के चुनावों के बाद बांग्लादेश में एक स्थिर लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीद कर रहा है।
अब से कुछ ही देर बाद, बेगम खालिदा जिया को शेर-ए-बांग्ला नगर के जिया उद्यान में उनके पति और पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की कब्र के बगल में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। वह कब्र पहले ही तैयार हो चुकी है, जो आने वाले समय में बांग्लादेश के संघर्षशील लोकतंत्र की एक बड़ी गवाह बनी रहेगी। ढाका आज सिर्फ एक नेता को नहीं, बल्कि अपनी पहचान के एक बड़े हिस्से को विदा कर रहा है।

