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खंडोली डैम में जल समाधि लेने कूदे JLKM, पुलिस ने बचाई जान

Giridih : झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को खंडोली बचाओ आंदोलन के तहत खंडोली डैम में जल समाधि लेने का प्रयास किया। पूर्व घोषित इस कार्यक्रम में कई नेता जलाशय में कूद गए, लेकिन पहले से अलर्ट पुलिस ने

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Giridih : झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के नेता और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को खंडोली बचाओ आंदोलन के तहत खंडोली डैम में जल समाधि लेने का प्रयास किया। पूर्व घोषित इस कार्यक्रम में कई नेता जलाशय में कूद गए, लेकिन पहले से अलर्ट पुलिस ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

सुबह से ही JLKM कार्यकर्ता खंडोली डैम के पास एकत्र हुए थे। जैसे ही आंदोलनकारियों ने डैम में छलांग लगाई, वहां मौजूद पुलिस बल हरकत में आया और तुरंत उन्हें बचाने के लिए पानी में उतर गया। इस दौरान नागेंद्र चंद्रवंशी, सूरज पंडित और अजय कुमार समेत कई नेता गहरे पानी में चले गए और जल समाधि लेने की धमकी देने लगे। हालांकि पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकालकर सुरक्षित किया।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खंडोली डैम की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि शहर के एक बड़े भू-माफिया ने डैम के पास मशरूम और अंडा प्लांट खोल दिया है, जिससे डैम का पानी दूषित हो रहा है। यह वही पानी है, जिससे गिरिडीह शहर की बड़ी आबादी अपनी प्यास बुझाती है।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि भू-माफियाओं को बेंगाबाद अंचल कार्यालय से संरक्षण मिल रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन जानबूझकर सरकारी जमीन की नापी कराने से बच रहा है। JLKM नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

JLKM नेता नागेंद्र चंद्रवंशी और अजय कुमार ने पत्रकारों से कहा कि खंडोली डैम न सिर्फ गिरिडीह की जीवनरेखा है, बल्कि एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। इसे बचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि वे अपने हक और अधिकार की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे और जरूरत पड़ने पर और बड़े आंदोलन की ओर कदम बढ़ाएंगे।

इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण भी आंदोलनकारियों के साथ मौजूद थे। लोगों का कहना था कि अगर समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया तो डैम और आसपास का पर्यावरण पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।

पुलिस और प्रशासन अब इस घटना के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। फिलहाल आंदोलनकारियों को सुरक्षित निकालकर वापस भेज दिया गया है, लेकिन खंडोली डैम को लेकर उठे सवालों ने शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

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