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Ranchi News: झारखंड में आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने वाले पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा कानून) की नियमावली अधिसूचित न करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में पेसा एक्ट लागू नहीं करने के खिलाफ दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई, जिसके दौरान अदालत ने हेमंत सरकार से जवाब मांगा है।
अदालत ने सीधे पूछा है कि पेसा एक्ट कानून की नियमावली बनाकर कितने दिनों के भीतर लागू की जाएगी।
बालू और लघु खनिज आवंटन पर रोक हटी नहीं
सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार की ओर से बालू सहित लघु खनिज के आवंटन पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया गया। हालांकि, अदालत ने सरकार के इस आग्रह को सिरे से खारिज कर दिया और खनिज आवंटन पर लगी रोक को बरकरार रखा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले पेसा एक्ट लागू करने की निश्चित तिथि की जानकारी दी जाए।
सरकार की ओर से बताया गया कि पंचायती राज विभाग ने पेसा नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। पहले यह प्रारूप कैबिनेट को-आर्डिनेशन कमेटी को भेजा गया था, लेकिन आपत्ति आने पर इसे संशोधित कर अब ड्राफ्ट कमेटी को भेजा गया है, जिसके बाद इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट भेजा जाएगा।
कोर्ट के आदेश के बाद भी 2024 तक नियमावली अधिसूचित नहीं
यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 29 जुलाई 2024 को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को दो माह के भीतर पेसा नियमावली अधिसूचित करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि संविधान के 73वें संशोधन और पेसा कानून की भावना के अनुरूप नियमावली तैयार कर लागू की जाए। बावजूद इसके, अब तक नियमावली अधिसूचित नहीं की गई है।
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बता दें कि पेसा कानून केंद्र सरकार ने 1996 में लागू किया था, जिसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करना है। एकीकृत बिहार से लेकर झारखंड गठन के बाद तक राज्य सरकार ने अब तक इस कानून के तहत नियमावली नहीं बनाई है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अधिवक्ता तान्या सिंह ने पक्ष रखा।

