रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र का चौथा दिन काफी गहमागहमी भरा रहा। शनिवार सुबह 11:06 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, डुमरी के चर्चित विधायक जयराम महतो ने सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा उठाकर सबको चौंका दिया।
स्थापना समिति में जनप्रतिनिधियों की एंट्री पर तकरार
जयराम महतो ने सदन में पुरजोर मांग उठाई कि विभागों की स्थापना समिति (Establishment Committee) में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि अधिकारियों के साथ जब विधायक बैठेंगे, तो भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और सरकारी कार्यों में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने पड़ोसी राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यह व्यवस्था पहले से लागू है। हालांकि, सरकार की ओर से मंत्री दीपक बिरुवा ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समिति ‘बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000’ के तहत चलती है और फिलहाल जनप्रतिनिधियों को इसमें शामिल करने का कोई विचार नहीं है, हालांकि अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन जरूर किया जाएगा।
बैकलॉग नियुक्तियों पर छिड़ी बहस
दूसरी ओर, खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने राज्य के आरक्षित वर्ग (ST/SC/OBC) के युवाओं का मुद्दा उठाते हुए बैकलॉग नियुक्तियों पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों से हजारों आरक्षित पद खाली पड़े हैं, जिससे युवाओं में आक्रोश है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एक निश्चित समय सीमा के भीतर इन पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाला जाए।
इस पर प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 50,000 रिक्तियों के दावे को गलत बताते हुए कहा कि सरकार बैकलॉग पदों को भरने के लिए बेहद गंभीर है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि विभागवार भर्ती प्रक्रिया जारी है और आरक्षण नियमों का पालन करते हुए इन पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है।



