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ईरान की खुली धमकी: ‘हमला हुआ तो अमेरिका को पछतावा करा देंगे’

Tehran (Iran): मध्य पूर्व (Middle East) के जलक्षेत्र में एक बार फिर बारूद की गंध फैलने लगी है। ईरान के साथ बढ़ते गतिरोध के बीच अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी कमान एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के हाथ में है, रणनीतिक मोर्चे

यूएसएस अब्राहम लिंकन

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Tehran (Iran): मध्य पूर्व (Middle East) के जलक्षेत्र में एक बार फिर बारूद की गंध फैलने लगी है। ईरान के साथ बढ़ते गतिरोध के बीच अमेरिकी नौसेना का सबसे शक्तिशाली स्ट्राइक ग्रुप, जिसकी कमान एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के हाथ में है, रणनीतिक मोर्चे पर तैनात कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इस चाल ने तेहरान को भड़का दिया है, जिसके जवाब में ईरान ने सीधी चेतावनी दी है कि अगर उसकी सीमाओं पर हमला हुआ, तो अंजाम ‘पछतावा कराने वाला’ होगा।

ईरान के भीतर जल रही है विद्रोह की आग

यह सैन्य तनाव तब बढ़ रहा है जब ईरान खुद अपने घर में सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। दिसंबर के अंत से शुरू हुआ महंगाई विरोधी प्रदर्शन अब ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ की जड़ों को हिलाने वाला जनआंदोलन बन चुका है। मानवाधिकार संगठनों के दावे रूह कंपा देने वाले हैं। पिछले 18 दिनों से ईरान में इंटरनेट पूरी तरह बंद है और इस ‘ब्लैकआउट’ के बीच सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने के आरोप लग रहे हैं। खबरों के मुताबिक, अब तक 5,800 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 17,000 से ज्यादा संभावित मौतों की जांच चल रही है।

हिज़्बुल्लाह की धमकी और पड़ोसियों का रुख

ईरान के समर्थन में लेबनान का संगठन हिज़्बुल्लाह भी मैदान में उतर आया है। नेता नईम कासेम ने एलान किया है कि अगर ईरान पर युद्ध थोपा गया, तो पूरी खाड़ी आग की लपटों में घिर जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका का करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जहाँ अमेरिका का बड़ा एयरबेस है, उसने साफ कह दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा।

ट्रंप की रणनीति और ईरान का पलटवार

राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे “भारी भरकम नौसैनिक बेड़ा” बताते हुए ईरान को शांत रहने की चेतावनी दी है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय ने पलटवार करते हुए कहा है कि एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी उनकी रक्षात्मक दृढ़ता को कम नहीं कर सकती। क्षेत्र में बढ़ती इस सैन्य हलचल ने तेल की कीमतों और वैश्विक सुरक्षा पर खतरे के बादल मंडरा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि ट्रंप की यह ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ ईरान को झुकने पर मजबूर करती है या यह तनाव एक विनाशकारी युद्ध में तब्दील हो जाता है।

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