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15 साल में विदेश यात्राओं पर भारतीयों ने लुटाए 15 लाख करोड़!

India News: भारतीयों की जीवनशैली और खर्च की प्राथमिकताएं अब बदल चुकी हैं। एक समय था जब विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना उनका सबसे बड़ा सपना होता था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। भारतीय अब विदेशों में शिक्षा से ज्यादा यात्रा पर पैसा

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India News: भारतीयों की जीवनशैली और खर्च की प्राथमिकताएं अब बदल चुकी हैं। एक समय था जब विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना उनका सबसे बड़ा सपना होता था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है। भारतीय अब विदेशों में शिक्षा से ज्यादा यात्रा पर पैसा लुटा रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2009-10 में जहां भारतीयों का झुकाव उच्च शिक्षा की ओर था, वहीं 2024-25 तक खर्च यात्रा पर होने लगा। यह खर्च इतना ज्यादा है कि बीते 15 सालों में इसमें करीब 1000 गुना की बढ़ोतरी हुई है।

लोगों की बदल रही जीवनशैली, शिक्षा से ज्यादा यात्रा पर लुटा रहे पैसा

वर्ष 2009-10 में विदेश यात्रा पर भारतीयों ने करीब 17 मिलियन डॉलर खर्च किए थे, जो 2024-25 में बढ़कर 17 बिलियन डॉलर यानी करीब 15 लाख करोड़ रुपए हो गए। यह खर्च 58.2 फीसदी की सालाना औसत वृद्धि के साथ बढ़ा है, जो कि आश्चर्यजनक रूप से करीब 975 गुना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय अब एफिल टॉवर से लेकर न्यूयॉर्क, रोम, तुर्की, मॉरीशस और ब्राजील तक सैर-सपाटा कर रहे हैं।

2009 में जहां 1.1 करोड़ भारतीयों ने विदेश की यात्रा की थी, वहीं कोरोना महामारी से पहले यह आंकड़ा 2.6 करोड़ था। महामारी के समय इसमें गिरावट आई, लेकिन उसके बाद इसमें फिर उछाल आया और 2022 में यह आंकड़ा दो करोड़ के पार हो गया। उच्च शिक्षा पर खर्च भी लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय विदेश में पढ़ाई के लिए 2024-25 में करीब 9.6 बिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं, जो कि 2009-10 के 549 मिलियन डॉलर से करीब 17 गुना ज्यादा है यानी शिक्षा पर भी खर्च बढ़ा है, लेकिन यात्रा की तुलना में यह बहुत कम है।

रिपोर्ट के मुताबिक विदेशों में भारतीयों का कुल खर्च 2024-25 तक 30 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जिसमें मेडिकल खर्च, गिफ्ट्स, निवेश, जमा, संपत्ति खरीद, दान और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शामिल हैं। 2009-10 में यह खर्च महज 983 मिलियन डॉलर था, जो अब 30 गुना बढ़ गया है। विदेश में शिक्षा और इलाज के अलावा अब भारतीय तोहफे बांटने, संपत्ति खरीदने और दान करने पर भी खुलकर खर्च कर रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि भारतीय अपने जीवन के हर क्षेत्र में गुणवत्ता चाहते हैं, चाहे वह शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो या फिर यात्रा।

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