Career Adda: भारत में तेजी से बढ़ रहे एविएशन सेक्टर के बीच पायलटों की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आगामी वर्षों में अनुमानित 30 से 31 हजार अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता को देखते हुए देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (एफटीओ) शुरू किए जाएंगे। एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) ने सात प्रमुख हवाई अड्डों पर इन एफटीओ स्लॉट के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है।
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क्यों बढ़ रही है पायलटों की मांग?
अगले पांच वर्षों में भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े में करीब 500 नए विमान शामिल करने की तैयारी कर रही हैं। वहीं देशभर में लगभग 50 नए एयरपोर्ट विकसित होने की संभावना है। टाटा ग्रुप की एयर इंडिया भी अगले 18 महीनों में 50 से 60 नए विमान अपने बेड़े में जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। ऐसे में प्रशिक्षित पायलटों और अन्य विमानन पेशेवरों की मांग लगातार बढ़ने की उम्मीद है।
देश में कितने फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर हैं?
वर्तमान में देश में डीजीसीए से मंजूर 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन 63 फ्लाइंग बेस से संचालित हो रहे हैं। नए 11 एफटीओ शुरुआती चरण में 60 से 70 ट्रेनिंग विमानों के साथ प्रशिक्षण शुरू करेंगे। बाद में इनकी क्षमता बढ़ाकर 110 से 120 विमानों तक की जा सकती है।
हर साल बढ़ेगी प्रशिक्षण क्षमता
इन नए संस्थानों में शुरुआती दौर में हर साल 400 से 500 विमानन पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा। पूरी क्षमता पर यह संख्या बढ़कर करीब 1,500 तक पहुंच सकती है। कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) जारी होने की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2018 में 640 सीपीएल जारी हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,628 हो गई।
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विदेश जाने की जरूरत होगी कम
इस पहल से भारतीय छात्रों के लिए देश में ही पायलट प्रशिक्षण की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। इससे विदेश जाकर ट्रेनिंग लेने की आवश्यकता कम होगी और प्रशिक्षण अधिक सुलभ एवं किफायती बन सकेगा। साथ ही क्षेत्रीय हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित होने की उम्मीद है।




