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धन्यवाद ट्रंप! जिनसे रिश्ते बिगड़ रहे थे, पटरी पर लौट रहे भारत-कनाडा के संबंध?

World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक राजनीति में कई समीकरण बदल दिए। खास बात यह है कि ट्रंप के कुछ फैसलों ने भारत और कनाडा जैसे देशों को भी करीब आने का मौका दिया। हाल ही में दोनों देशों के बीच

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World News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक राजनीति में कई समीकरण बदल दिए। खास बात यह है कि ट्रंप के कुछ फैसलों ने भारत और कनाडा जैसे देशों को भी करीब आने का मौका दिया। हाल ही में दोनों देशों के बीच फिर से दोस्ताना रिश्तों की शुरुआत हुई है, जो कुछ समय पहले तक तनावपूर्ण थे।

तनाव से विश्वास की ओर

2023 में भारत और कनाडा के रिश्तों में बड़ा संकट आया था। उस वक्त कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत सरकार पर लगाया था। इस आरोप के बाद रिश्ते बेहद तल्ख हो गए थे और दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों को वापस बुला लिया था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मुलाकात के बाद रिश्तों में फिर से गर्माहट आई है।

अनिता आनंद का भारत दौरा

कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद अगले महीने भारत यात्रा पर आ सकती हैं। यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यह 2023 के बाद किसी भी कनाडाई विदेश मंत्री की पहली यात्रा होगी। अनिता आनंद वही मंत्री हैं जिन्होंने गीता पर हाथ रखकर शपथ ली थी। उनकी यात्रा से संकेत मिल रहा है कि दोनों देश अब संवाद और सहयोग को नई दिशा देना चाहते हैं।

ट्रंप फैक्टर

डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति रहते हुए कनाडा पर टैरिफ लगाए और कई बार कड़े बयान दिए। यहां तक कि उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने तक की बात कह डाली थी। भारत पर भी टैरिफ लगाए गए। इस माहौल ने भारत और कनाडा को अपने पुराने मतभेद भुलाकर साझेदारी पर दोबारा जोर देने के लिए प्रेरित किया।

आगे का रास्ता

दोनों देशों ने हाल ही में अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति की है। भारत की ओर से दिनेश पटनायक और कनाडा की ओर से क्रिस्टोफर कूटर को यह जिम्मेदारी दी गई है। अब व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात हो रही है। साथ ही, राजनयिक स्टाफ की कमी दूर करने पर भी सहमति बनी है ताकि छात्रों और कारोबारियों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

यह कहना गलत नहीं होगा कि अमेरिका और खासकर डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत और कनाडा को करीब ला दिया है। आने वाले महीनों में यह साझेदारी और मजबूत होती दिख सकती है।

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