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आदिवासी विकास के लिए अहम कदम : 50+109 नए आँगनबाड़ी केंद्र और छात्रवृत्ति विस्तार

Ranchi : राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में आदिवासी कल्याण और शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के तहत राज्य के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में 50 नए आँगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना, संचालन

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Ranchi : राज्य मंत्रिपरिषद की मंगलवार को हुई बैठक में आदिवासी कल्याण और शिक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DAJGUA) के तहत राज्य के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में 50 नए आँगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना, संचालन और भवन निर्माण को स्वीकृति दी गई है। यह कदम आदिवासी बच्चों की शिक्षा और पोषण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

साथ ही, मरङ गोमके जयपाल सिंह मुण्डा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना, 2020 (संशोधित 2022) के तहत छात्र-छात्राओं की अनुमानित संख्या में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। इसके माध्यम से अधिक आदिवासी छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उनकी शिक्षा की राह में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के तहत Particularly Vulnerable Tribal Group (PVTG) बहुल क्षेत्रों में 109 नए आँगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना, संचालन और भवन निर्माण को भी स्वीकृति दी गई। इन केंद्रों के माध्यम से आदिवासी बच्चों को न केवल पोषण मिलेगा, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा।

राज्य सरकार ने बताया कि इन सभी पहलों का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समुदाय के बच्चों और युवाओं को बेहतर शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है। मंत्रिपरिषद ने यह भी जोर दिया कि आँगनबाड़ी केंद्र केवल शिक्षा और पोषण का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि यह समुदाय में सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण उपकरण भी बनेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि DAJGUA और PM-JANMAN जैसी योजनाएं आदिवासी समाज में स्थायी विकास और सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी। वहीं, छात्रवृत्ति योजना का विस्तार आदिवासी युवाओं को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस प्रकार, राज्य सरकार ने आदिवासी कल्याण और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस कदम उठाते हुए एक व्यापक रणनीति अपनाई है, जिससे झारखंड के आदिवासी समुदाय को लंबी अवधि में स्थायी लाभ मिलेगा।

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