रांची: राजधानी में सीबीएसई, आईसीएसई और झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की बोर्ड परीक्षाएँ 2026 शुरू हो चुकी हैं। छात्रों की एकाग्रता और पढ़ाई में खलल न पड़े, इसे सुनिश्चित करने के लिए रांची जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। झारखंड उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद, उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए हैं।
परीक्षार्थियों की शांति सर्वोपरि
वर्तमान में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं चल रही हैं, जबकि फरवरी के अंतिम सप्ताह से मार्च के पहले सप्ताह तक कक्षा 8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं भी शुरू होने वाली हैं। जिला प्रशासन ने पाया है कि नगर निगम चुनाव के प्रत्याशी, रेस्टोरेंट संचालक और विभिन्न आयोजक लाउडस्पीकर और डीजे का बेधड़क इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ध्वनि का स्तर निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक पाया गया, तो संबंधित प्रत्याशी, वाहन मालिक या रेस्टोरेंट संचालक के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी और उनके उपकरण जब्त कर लिए जाएंगे।
क्या हैं ध्वनि प्रदूषण के मानक
प्रशासन ने ‘नॉइज़ पॉल्यूशन रूल्स, 2000’ का हवाला देते हुए डेसिबल की सीमा तय की है:
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आवासीय क्षेत्र: दिन में 55 dB(A) और रात में 45 dB(A)।
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वाणिज्यिक क्षेत्र: दिन में 65 dB(A) और रात में 55 dB(A)।
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रात्रि प्रतिबंध: रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है।
बुजुर्गों और मरीजों का भी रखा जाएगा ख्याल
उपायुक्त ने अनुमंडल पदाधिकारी सदर, कुमार रजत को इन मानकों का पालन कराने के लिए विशेष टास्क फोर्स तैनात करने को कहा है। अत्यधिक शोर न केवल छात्रों की पढ़ाई में बाधा डालता है, बल्कि वृद्धजनों, गर्भवती महिलाओं और दिल के मरीजों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। शहर के बार, ओपन रेस्टोरेंट और सार्वजनिक स्थलों पर देर रात तक बजने वाले संगीत पर अब पुलिस की पैनी नजर रहेगी।
जनता से अपील और शिकायत तंत्र
प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे एक जागरूक समाज की जिम्मेदारी निभाएं। यदि आपके क्षेत्र में कोई निर्धारित सीमा से अधिक शोर कर रहा है, तो इसकी सूचना तत्काल स्थानीय थाना या जिला नियंत्रण कक्ष को दें।



