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युगांडा का वो ‘नरभक्षी’ तानाशाह, जो इंसानों का मांस तक खा गया!

World News: इतिहास में कई क्रूर शासक हुए, लेकिन ‘बुचर ऑफ युगांडा’ के नाम से कुख्यात ईदी अमीन की दरिंदगी की मिसाल मिलना नामुमकिन है। अमीन ने युगांडा की सत्ता पर आठ साल तक राज किया, लेकिन यह शासन नहीं, बल्कि साक्षात मौत का नंगा

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World News: इतिहास में कई क्रूर शासक हुए, लेकिन ‘बुचर ऑफ युगांडा’ के नाम से कुख्यात ईदी अमीन की दरिंदगी की मिसाल मिलना नामुमकिन है। अमीन ने युगांडा की सत्ता पर आठ साल तक राज किया, लेकिन यह शासन नहीं, बल्कि साक्षात मौत का नंगा नाच था। अमीन पर आरोप थे कि वह न केवल अपने विरोधियों को बेरहमी से मरवाता था, बल्कि उनके शवों के साथ ऐसी हैवानियत करता था जिसे सुनकर आज भी रूह कांप जाती है।

फ्रिज में कटे सिर और नरभक्षण का काला सच

ईदी अमीन के पूर्व सहयोगियों और देश छोड़कर भागे चश्मदीदों ने चौंकाने वाले खुलासे किए थे। कहा जाता है कि अमीन अपने दुश्मनों को यातनाएं देकर मारता और फिर उनका मांस तक खा जाता था। उसके महल के फ्रिज में कई कटे हुए सिर बरामद होने की खबरें भी दुनिया भर के अखबारों की सुर्खियां बनी थीं। वह विरोधियों की लाशों को मगरमच्छों के आगे फिंकवा देता था। इतिहासकारों के मुताबिक, उसके आठ साल के कार्यकाल में करीब 3 से 5 लाख निर्दोष लोगों की हत्या करवाई गई।

भारतीयों को निकाला और अर्थव्यवस्था को किया बर्बाद

ईदी अमीन की क्रूरता का असर सिर्फ जानमाल तक सीमित नहीं था। उसने युगांडा में रह रहे एशियाई मूल के लोगों, विशेषकर भारतीयों को देश छोड़ने के लिए मात्र 90 दिनों का अल्टीमेटम दिया। इस सनकी फैसले ने हजारों संपन्न परिवारों को रातों-रात सड़कों पर ला दिया। भारतीयों के जाने से युगांडा का व्यापार और उद्योग पूरी तरह ठप हो गया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था दशकों पीछे चली गई। उसकी निर्दयता से उसकी पत्नियां भी नहीं बच सकीं; रिपोर्ट्स की मानें तो उसने अपनी ही एक पत्नी की हत्या कर उसके शव के टुकड़े कर दिए थे।

सत्ता का पतन और सऊदी अरब में गुमनाम मौत

अमीन के अहंकार ने ही उसके पतन की इबारत लिखी। तंजानिया के साथ सीमा विवाद और वहां के क्षेत्रों पर कब्जे की कोशिश उसकी सबसे बड़ी भूल साबित हुई। तंजानियाई सेना ने जब पलटवार किया, तो खौफ का साम्राज्य ताश के पत्तों की तरह ढह गया। अपनी जान बचाने के लिए अमीन देश छोड़कर भाग खड़ा हुआ। अंततः उसे सऊदी अरब में पनाह मिली, जहां 2003 में इस खूंखार तानाशाह की मौत हुई। आज भी युगांडा के लोग उसके दौर को एक ‘काला अध्याय’ मानकर याद करते हैं।

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