Chandigarh: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) के सरकारी फंड के दुरुपयोग से जुड़े हाई-प्रोफाइल मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सरकारी अधिकारियों और आईडीएफसी (IDFC) बैंक (IDFC Bank Fraud) के कर्मचारियों सहित कुल 9 आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं।

CBI अधिकारियों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इन घोटालों के कारण सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है। हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंक लेन-देन के जरिए लगभग 504 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश (UT) से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि आंकी गई है। कुल मिलाकर यह घोटाला 657 करोड़ रुपये का है और एजेंसी ने साफ किया है कि जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कुछ और पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती हैं।

भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की कड़क धाराएं

सीबीआई के आधिकारिक बयान के मुताबिक, दाखिल की गई चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy), आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की कड़क धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

  • हरियाणा मामला (पंचकूला कोर्ट): हरियाणा सरकार के फंड हेराफेरी से जुड़ी यह दूसरी चार्जशीट पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की गई है। इसमें दो निजी व्यक्तियों को मुख्य रूप से आरोपी बनाया गया है, जो इस अवैध धन के सीधे लाभार्थी (Beneficiaries) पाए गए हैं। इससे पहले सीबीआई इस मामले में 15 आरोपियों (3 सरकारी कर्मचारी, 6 बैंक अधिकारी, 2 कंपनियां और 4 निजी व्यक्ति) के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

  • चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी मामला (चंडीगढ़ कोर्ट): चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) फंड दुरुपयोग मामले में यह पहली चार्जशीट है, जिसे चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया गया। इसमें कुल 7 आरोपियों को नामजद किया गया है, जिनमें 5 बैंक अधिकारी, सीएससीएल का 1 अधिकारी और 1 निजी व्यक्ति शामिल है।

छह ठिकानों पर छापेमारी और अफसरों की मिलीभगत

यह मामला तब सीबीआई के पास आया जब एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से 8 विभागों के मामलों को और चंडीगढ़ पुलिस के आर्थिक अपराध विंग (EOW) से चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी व ‘क्रेस्ट’ से जुड़े मामलों की जांच अपने हाथ में ली थी। इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह सीबीआई ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में 6 प्रमुख ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी।

इस तलाशी अभियान में हरियाणा कैडर के कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के आवास और विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड व उसके निदेशक के ठिकानों को खंगाला गया था। जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि कुछ भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ सांठगांठ कर अवैध तरीके से खाते खुलवाए, सरकारी धनराशि को ट्रांसफर किया और बाद में उसे फर्जी कंपनियों व निजी खातों में रूट कर दिया। इस बड़े सिंडिकेट के अन्य कड़ियों की तलाश के लिए सीबीआई की जांच अभी भी जारी है।

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