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तनाव, अनिद्रा और नशे से बढ़ सकता है पेटदर्द, जानें IBS के लक्षण

तनाव और नींद की कमी IBS के लक्षणों को प्रभावित कर सकती है। जानें पेटदर्द, कब्ज, दस्त और एसिडिटी जैसे लक्षणों में खानपान और जीवनशैली कैसे मदद कर सकती है।

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New Delhi: तनाव और नींद की कमी का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। इरिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी IBS में पेटदर्द के साथ कब्ज, दस्त और मल त्याग की आदत में बदलाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं। विशेषज्ञ IBS को ब्रेन-गट इंटरैक्शन से जुड़ी समस्या मानते हैं और तनाव कुछ लोगों में इसके लक्षणों को बढ़ा सकता है।

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तनाव का पेट पर पड़ सकता है असर

IBS में दिमाग और आंत के बीच होने वाली गतिविधियों में बदलाव लक्षणों को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों में तनाव या चिंता के दौरान पेटदर्द, पेट फूलना और मल त्याग से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि IBS का एक ही कारण नहीं होता। अलग-अलग लोगों में तनाव, खानपान, संक्रमण या कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता जैसे अलग-अलग कारक भूमिका निभा सकते हैं।

IBS के प्रमुख लक्षण

IBS के सामान्य लक्षणों में पेटदर्द और मल त्याग की आदत में बदलाव शामिल हैं। कुछ लोगों को कब्ज होती है, जबकि कुछ को दस्त या दोनों की समस्या हो सकती है। पेट फूलना और मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ नहीं होने जैसा महसूस होना भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकता है।

खानपान पर दें विशेष ध्यान

IBS में हर व्यक्ति के लिए एक जैसा खानपान काम नहीं करता। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर डाइट में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। कुछ मामलों में फाइबर बढ़ाने या लो-FODMAP डाइट अपनाने की सलाह दी जाती है। फाइबर को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर माना जाता है, क्योंकि अचानक अधिक फाइबर लेने से गैस और पेट फूलने की समस्या बढ़ सकती है।

कौन से भोजन से परेशानी बढ़ सकती है?

मूल सामग्री में मक्का, आलू, राजमा, लोबिया, प्याज, फूलगोभी, पत्तागोभी और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों को कम करने की सलाह दी गई है। लेकिन IBS में हर व्यक्ति के ट्रिगर अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी भोजन को पूरी तरह बंद करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उससे वास्तव में लक्षण बढ़ते हैं या नहीं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या डाइटिशियन की मदद ली जा सकती है।

तनाव कम करना भी जरूरी

IBS के लक्षणों को नियंत्रित करने में तनाव कम करना और पर्याप्त नींद लेना मददगार हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को भी उपचार का हिस्सा बनाया जा सकता है। मेडिटेशन, रिलैक्सेशन एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी थेरेपी भी कुछ मरीजों में IBS के लक्षणों को बेहतर करने में मदद कर सकती है।

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नशे से दूरी रखना बेहतर

मूल सामग्री में शराब और सिगरेट से दूर रहने की सलाह दी गई है। पेट की परेशानी होने पर नशे की आदत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और अपनी जीवनशैली में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और संतुलित खानपान को दिनचर्या का हिस्सा बनाना उपयोगी हो सकता है।

IBS का इलाज कैसे होता है?

IBS का इलाज मरीज के लक्षणों के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर खानपान और जीवनशैली में बदलाव के साथ जरूरत पड़ने पर दवाएं, प्रोबायोटिक्स या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी थेरेपी की सलाह दे सकते हैं। कब्ज वाले IBS में फाइबर सप्लीमेंट या दूसरी दवाओं और दस्त वाले मामलों में अलग तरह की दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसलिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए।

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आयुर्वेदिक उपायों को लेकर सावधानी

मूल सामग्री में कच्चे बेल का चूर्ण, नमकीन छाछ, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और अश्वगंधा जैसे उपायों का उल्लेख है। इनका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है, खासकर अगर व्यक्ति पहले से कोई दवा ले रहा हो। किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपाय को डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

लगातार पेटदर्द हो तो जांच जरूरी

बार-बार पेटदर्द, कब्ज या दस्त को केवल तनाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। IBS की पहचान लक्षणों के पैटर्न और जरूरत पड़ने पर दूसरी बीमारियों को बाहर करने के लिए जांच के आधार पर की जाती है।

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