रामगढ़: न्याय के मंदिर कहे जाने वाले कोर्ट परिसर के बाहर बुधवार को रिश्तों की मर्यादा तार-तार होती नजर आई। रामगढ़ कोर्ट परिसर के बाहर उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक महिला ने अपने पति का कॉलर पकड़कर उसकी जमकर फजीहत कर दी। मामला इतना गंभीर था कि एक पिता ने अपनी ही ढाई साल की मासूम बच्ची को अपनी संतान मानने से साफ इनकार कर दिया।
शादी के बाद बढ़ा विवाद, अब बच्ची पर सवाल
मामला रामगढ़ जिले के बोंगाबार गांव की रहने वाली सोनी कुमारी और हजारीबाग के पबरा निवासी राजेंद्र कुमार राम उर्फ राजू से जुड़ा है। दोनों की शादी वर्ष 2021 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई और मामला कोर्ट की चौखट तक जा पहुंचा। सोनी ने अपने पति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
जमानत मिलते ही बदला पति का रंग
सोनी कुमारी का आरोप है कि उसका पति दोहरा खेल खेल रहा है। सोनी ने बताया कि जब राजेंद्र को कोर्ट से जमानत लेनी थी, तब उसने जज के सामने स्वीकार किया था कि बच्ची उसी की है। लेकिन जैसे ही जमानत मिल गई और मामला मेंटेनेंस (भरण-पोषण) के केस तक पहुंचा, तो उसने पलटी मार दी। राजेंद्र ने अब ढाई साल की मासूम को अपनी बेटी मानने से इनकार कर दिया है और अपनी पत्नी के चरित्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
महिला तैयार, पुरुष भाग रहा
पति द्वारा चरित्र पर लांछन लगाए जाने और बेटी को ठुकराने से नाराज सोनी का गुस्सा कोर्ट के बाहर फूट पड़ा। उसने सरेआम अपने पति को डीएनए (DNA) टेस्ट की चुनौती दे डाली। सोनी ने चीखते हुए कहा, “जब मैं एक महिला होकर जांच के लिए तैयार हूं, तो मेरा पति सच्चाई से क्यों भाग रहा है?” हंगामे को बढ़ता देख वहां मौजूद वकीलों ने हस्तक्षेप किया और दोनों को शांत कराया। वकीलों ने सलाह दी कि सड़क पर फैसला करने के बजाय कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया और फैसले का इंतजार करना ही उचित होगा। इस घटना ने एक बार फिर समाज में टूटते रिश्तों और मासूम बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।



