Lifestyle Adda: अक्सर देखा जाता है कि बच्चे किताबों का नाम सुनते ही या स्कूल के होमवर्क का जिक्र होते ही उससे दूर भागने लगते हैं। ऐसी स्थिति में अक्सर माता-पिता बच्चों पर गुस्सा करने लगते हैं या उन्हें डांटने-फटकारने लगते हैं, जिससे स्थिति सुधरने के बजाय और अधिक बिगड़ जाती है। इस विषय पर बाल मनोविज्ञान विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों पर नकारात्मक प्रतिक्रिया देने के बजाय सही और सकारात्मक तरीका अपनाना चाहिए। इससे न केवल बच्चों में पढ़ाई के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा की जा सकती है, बल्कि उन्हें एक बेहतर शिक्षार्थी भी बनाया जा सकता है।
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डांटने और दबाव बनाने से घटती है बच्चे की रुचि
शिक्षा विशेषज्ञों और जानकारों का कहना है कि अधिकतर बच्चे स्वभाव से आलसी नहीं होते हैं, बल्कि उन्हें केवल पढ़ाई की शुरुआत करने के लिए एक सही प्रेरणा और दिशा की आवश्यकता होती है। ठीक वैसे ही जैसे किसी पुराने स्कूटर को चालू करने के लिए सही किक की जरूरत पड़ती है, उसी तरह बच्चे के दिमाग को भी पढ़ाई शुरू करने के लिए एक सकारात्मक पुश की जरूरत होती है। लगातार डांटना, उन पर पढ़ाई का दबाव बनाना या पढ़ाई को उबाऊ बनाना बच्चे की अंदरूनी रुचि को कम कर देता है। इसके विपरीत, माता-पिता का एक छोटा सा प्रोत्साहन या सही मार्गदर्शन उन्हें मानसिक रूप से तैयार कर सकता है।
छोटे लक्ष्य देने का 5 मिनट वाला फॉर्मूला
मनोवैज्ञानिकों की सलाह है कि बच्चों को एक साथ कई घंटों तक लगातार पढ़ने के लिए मजबूर करने के बजाय उन्हें छोटे और आसानी से हासिल होने वाले लक्ष्य दिए जाने चाहिए। उदाहरण के तौर पर, बच्चे से केवल पांच मिनट तक ध्यान लगाकर पढ़ने या गणित के केवल पांच सवाल हल करने के लिए कहा जा सकता है। आमतौर पर यह देखा गया है कि जब बच्चा एक बार पढ़ाई शुरू कर देता है, तो वह इन पांच मिनटों के बीत जाने के बाद भी बिना किसी दबाव के काफी देर तक पढ़ाई जारी रखता है। यह तरीका पढ़ाई के बोझ को कम करता है और लक्ष्य पूरा होने पर बच्चे में आत्मविश्वास भी बढ़ाता है।
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गलती करने के डर को दूर करना है जरूरी
कई बार बच्चे पढ़ाई से इसलिए भी कतराते हैं क्योंकि उनके मन में गलती होने पर डांट खाने या आलोचना का शिकार होने का डर रहता है। उन्हें लगता है कि यदि उनसे कोई भूल हुई तो माता-पिता उन पर नाराज होंगे या उनकी योग्यता पर सवाल उठाएंगे। इसलिए पढ़ाई शुरू कराने से पहले बच्चों को यह विश्वास दिलाना बेहद जरूरी है कि गलतियां होना सीखने की प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है। उन्हें यह भरोसा दें कि गलती होने पर उन्हें शांत और धैर्यपूर्ण तरीके से समझाया जाएगा।
सकारात्मक माहौल और निरंतर प्रोत्साहन से मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि यदि बच्चों को बिना किसी डर या मानसिक दबाव के सीखने का खुशनुमा माहौल मिलता है, छोटे लक्ष्य निर्धारित करने में उनकी मदद की जाती है और उनके हर छोटे प्रयास की तारीफ होती है, तो वे धीरे-धीरे खुद पढ़ाई में रुचि लेने लगते हैं। माता-पिता का धैर्य, सकारात्मक बातचीत और लगातार प्रोत्साहन बच्चों के अकादमिक आत्मविश्वास को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है।
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