London: क्या आप सोच सकते हैं कि आसमान में उड़ने वाला कोई खूबसूरत पक्षी इतना खतरनाक हो सकता है कि उसे सिर्फ छूने मात्र से ही इंसानों की जान पर बन आए? विज्ञान की दुनिया से एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा सामने आया है। दुनिया का सबसे विषैला पक्षी (World’s Most Poisonous Bird) खोजा गया है, जिसका नाम है ‘हूडेड पिटोहुई’ (Hooded Pitohui)। मुख्य रूप से न्यू गिनी के सुदूर और बेहद घने जंगलों में पाया जाने वाला यह अनोखा पक्षी देखने में जितना आकर्षक है, अंदर से उतना ही घातक है।

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इस रहस्यमयी पक्षी की खोज 1980 के दशक में मशहूर वैज्ञानिक जैक डंबाचर (Jack Dumbacher) ने की थी। वे न्यू गिनी में अपने फील्डवर्क (Fieldwork) के दौरान पक्षियों पर रिसर्च कर रहे थे, तभी पहली बार यह पक्षी उनके जाल में फंसा। पक्षी को जाल से निकालते समय जैसे ही जैक के हाथ उसकी त्वचा से छुए, उसके कुछ ही क्षणों बाद उन्हें अपने हाथों, आंखों और मुंह में एक तीखी जलन, झुनझुनी और सुन्नपन (Numbness) महसूस होने लगा। काफी गहन जांच और प्रयोगशाला में हुए शोध (Lab Research) के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि इस पक्षी की त्वचा और पंखों में एक जानलेवा जहर मौजूद होता है।

पंखों में छुपा है मेंढक वाला घातक जहर (Deadly Batrachotoxin)

वैज्ञानिक जैक डंबाचर और उनकी टीम की शोध रिपोर्ट के अनुसार, हूडेड पिटोहुई के शरीर में बैट्राकोटॉक्सिन (Batrachotoxin) नामक एक अत्यंत खतरनाक न्यूरोटॉक्सिन (Neurotoxin) पाया जाता है। यह ठीक वही शक्तिशाली जहर है जो अमेज़न के जंगलों में पाए जाने वाले कुछ बेहद विषैले ‘पॉइजन डार्ट मेंढकों’ में मिलता है। यह जहर इस पक्षी के लिए प्रकृति का दिया हुआ एक अभेद्य सुरक्षा कवच (Safety Shield) है, जो इसे परजीवियों और शिकारियों से बचाता है। यदि कोई अन्य जंगली जानवर या शिकारी इस पक्षी को खाने की कोशिश करता है, तो उसे पैरालिसिस (Paralysis) यानी लकवा मार सकता है या उसकी तुरंत मौत हो सकती है।

कीड़े खाकर खुद को बनाता है ‘विदेशी जहर की दुकान’

इस खोज का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि हूडेड पिटोहुई स्वयं अपने शरीर के भीतर इस जहर का निर्माण नहीं करता। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पक्षी अपनी अनूठी आहार प्रणाली (Dietary System) के माध्यम से यह जहर हासिल करता है। यह जंगल में पाए जाने वाले ‘मेलिरिड बीटल्स’ (Choresine Beetles) नामक अत्यधिक जहरीले कीड़ों को चाव से खाता है। इन कीड़ों में प्राकृतिक रूप से बैट्राकोटॉक्सिन मौजूद होता है। इन जहरीले कीड़ों को पचाने के बाद, यह टॉक्सिन धीरे-धीरे पक्षी के चयापचय से होते हुए उसकी त्वचा और पंखों की परतों में जमा हो जाता है, जिससे यह खुद एक चलता-फिरता जहर बन जाता है।

चमकीला रंग है मौत की चेतावनी (Aposematism)

हूडेड पिटोहुई के चमकीले काले और नारंगी रंग के पंख सिर्फ खूबसूरती के लिए नहीं हैं। जीव विज्ञान की भाषा में इस घटना को अपोसेमेटिज्म (Aposematism) कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘चेतावनी देने वाला रंगरूप’। यह चमकीला रंग अन्य जंगली जानवरों और इंसानों को दूर रहने का संकेत देता है कि यह प्राणी बेहद खतरनाक हो सकता है।

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यही वजह है कि न्यू गिनी के स्थानीय आदिवासी और समुदाय के लोग इस पक्षी से हमेशा एक सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं। वहां के स्थानीय लोग इसे ‘रबिश बर्ड’ (Rubbish Bird) यानी बेकार पक्षी भी कहते हैं, क्योंकि इसका मांस न तो खाया जा सकता है और न ही इसे छुआ जा सकता है। वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि दुनिया में ऐसे पक्षी उंगलियों पर गिनने लायक ही हैं जो अपनी आत्मरक्षा के लिए केमिकल वॉरफेयर (Chemical Warfare) या जहर का उपयोग करते हैं, इसलिए यह पक्षी आज भी वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ा कौतूहल बना हुआ है।

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