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दुनिया का सबसे गुप्त देश, जहां समलैंगिकता की सजा है यातना और मौ’त

World News: तुर्कमेनिस्तान को दुनिया के सबसे रहस्यमयी और दमनकारी देशों में गिना जाता है। यहां से बाहर निकलने में सफल हुए दो लोगों ने अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे समलैंगिक होने की वजह से उन्हें जेल और मानसिक अस्पतालों

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World News: तुर्कमेनिस्तान को दुनिया के सबसे रहस्यमयी और दमनकारी देशों में गिना जाता है। यहां से बाहर निकलने में सफल हुए दो लोगों ने अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे समलैंगिक होने की वजह से उन्हें जेल और मानसिक अस्पतालों में प्रताड़ित किया गया, पीटा गया और कई बार उनके साथ बलात्कार किया गया।

तुर्कमेनिस्तान में समलैंगिक होना पाप!

तेल और गैस से समृद्ध यह मध्य एशियाई देश अक्सर अपने नेता गुरबांगुली बर्डीमुखामेदोव की अजीबोगरीब हरकतों के लिए सुर्खियों में रहता है। डेंटिस्ट से तानाशाह बने इस शासक ने अपने घोड़े पर कविताएं लिखीं और अपनी फुटबॉल टीम को कभी हारने नहीं दिया। लेकिन इन तमाशों के पीछे की असली तस्वीर बेहद खौफनाक है।

रेप, जेल और मेंटल हॉस्पिटल में टॉर्चर…

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच के मुताबिक, तुर्कमेनिस्तान में विरोधियों और अल्पसंख्यकों को बेरहमी से सताया जाता है। खासकर एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोग सबसे ज्यादा शिकार होते हैं। उन्हें जेलों में डाल दिया जाता है या मनोरोग अस्पतालों में जबरन भर्ती कर दिया जाता है।

अर्सलान नाम के युवक ने बताया कि उसे अश्गाबात में गिरफ्तार किया गया और “अप्राकृतिक यौनाचार” के आरोप में जेल भेजा गया। जेल में रहते हुए उसके साथ पांच बार बलात्कार हुआ। यहां तक कि एचआईवी पॉजिटिव कैदियों को भी इलाज नहीं दिया गया और उन्हें धीमी मौत मरने के लिए छोड़ दिया गया। एक अन्य शख्स डेविड ने कहा कि जेल में उसके यातना देने वालों ने पीटा और रेप किया। उन्होंने खून से बचने के लिए दस्ताने पहने थे।

अर्सलान के मुताबिक, जब उसने जेल डायरेक्टर से शिकायत की तो वह हंस पड़ा और बोला—“तुम्हें इसी के लिए यहां लाया गया है।” उसकी बैरक में मौजूद 72 कैदियों में से करीब 40 सिर्फ इसलिए बंद थे क्योंकि वे समलैंगिक थे। एक बार उसे नशा देकर लगातार बलात्कार किया गया। बाद में उसे माफी मिलने के बावजूद बार-बार गिरफ्तार किया गया और 2021 तथा 2022 में दो बार मानसिक अस्पताल भेजा गया। वहां उसे “बीमार” बताकर जबरन इलाज के नाम पर प्रताड़ित किया गया।

तुर्कमेनिस्तान के अधिकारी इन आरोपों पर चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि संयुक्त राष्ट्र में उन्होंने दावा किया कि देश में भेदभाव अवैध है। साथ ही यह भी कहा कि समलैंगिकता अपराध है क्योंकि यह “तुर्कमेन परंपराओं” के खिलाफ है। लेकिन पीड़ितों की कहानियां इस देश में आज भी इंसानियत की सच्चाई बयां करती हैं।

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