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होलाष्टक शुरू: सावधान! इन 8 दिनों में भूलकर भी न करें ये शुभ काम

Spiritual Desk: रंगों के त्योहार होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इस काल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के पहले दिन ही भगवान शिव ने अपनी तीसरी

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Spiritual Desk: रंगों के त्योहार होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में इस काल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के पहले दिन ही भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म किया था। इसके अलावा, ज्योतिषीय दृष्टि से इन आठ दिनों में प्रतिदिन अलग-अलग ग्रह उग्र रूप में होते हैं, जिसके कारण सकारात्मक ऊर्जा का अभाव रहता है। यही वजह है कि इस अवधि में किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों को करने की मनाही होती है।

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होलाष्टक में क्या न करें: इन बातों का रखें विशेष ध्यान

विशेषज्ञों के अनुसार, होलाष्टक के दौरान शादी-विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नामकरण जैसे संस्कारों को टाल देना चाहिए। माना जाता है कि इस समय शुरू किए गए कार्यों में बाधाएं आने की संभावना अधिक रहती है। इसके अतिरिक्त, नया व्यापार शुरू करना, संपत्ति की खरीद या बड़ा निवेश करना भी इस अवधि में शुभ नहीं माना जाता।

मानसिक शांति बनाए रखने के लिए इस दौरान विवाद, क्रोध और बहस से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि नकारात्मक विचार और आलस्य इस समय हावी हो सकते हैं। आहार की बात करें तो मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए ताकि मन और शरीर संतुलित रहे। हालांकि, जन्म और मृत्यु से जुड़े अनिवार्य कार्यों पर यह पाबंदी लागू नहीं होती।

भक्त प्रह्लाद की पीड़ा और होलाष्टक का महत्व

होलाष्टक का समापन 3 मार्च को होगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इन्हीं आठ दिनों में असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति छोड़ने के लिए भीषण प्रताड़नाएं दी थीं। प्रह्लाद को दिए गए उन कष्टों की याद में भी इस समय को शुभ नहीं माना जाता।

क्या करें इन आठ दिनों में?

ज्योतिषियों का सुझाव है कि होलाष्टक के दौरान भगवान का ध्यान और पूजन फलदायी होता है। इन दिनों में हनुमान चालीसा का पाठ और विष्णु सहस्त्रनाम का जप विशेष लाभ देता है। नकारात्मक लोगों से दूरी बनाएं और अपना समय सकारात्मक गतिविधियों में लगाएं।

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