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रांची बेकन फैक्ट्री की बदलेगी सूरत, हैदराबाद की संस्था संग ऐतिहासिक समझौता

रांची: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में रांची स्थित ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार और राज्य में मांस प्रसंस्करण (Meat Processing) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण

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रांची: झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने की दिशा में गुरुवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की उपस्थिति में रांची स्थित ऐतिहासिक बेकन फैक्ट्री के पुनरुद्धार और राज्य में मांस प्रसंस्करण (Meat Processing) के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह समझौता भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय मांस और पॉल्ट्री अनुसंधान संस्थान (ICAR-NMRI), हैदराबाद और झारखंड सरकार के पशुपालन निदेशालय के बीच संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल राज्य के पशुपालकों के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

समझौता कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा, “यह एमओयू केवल एक कागजी समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारे राज्य के पशुधन क्षेत्र में ‘वैल्यू एडिशन’ को बढ़ावा देने की एक ठोस पहल है। इससे पशुपालन से जुड़ी योजनाओं को न केवल मजबूती मिलेगी, बल्कि स्थानीय किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”

बेकन फैक्ट्री का होगा कायाकल्प

रांची की बेकन फैक्ट्री, जो कभी मांस प्रसंस्करण का प्रमुख केंद्र थी, अब आधुनिक तकनीक से लैस होगी। ICAR-NMRI के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम. मुथुकुमार ने बताया कि इस सहयोग के जरिए झारखंड के मीट सेक्टर में आधुनिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक पद्धतियों को पेश किया जाएगा। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि फैक्ट्री का पुनरुद्धार एक ‘कैटलिस्ट’ (उत्प्रेरक) के रूप में काम करेगा, जिससे उद्यमियों और उपभोक्ताओं दोनों को उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद मिल सकेंगे।

समझौते (MoU) की मुख्य बातें:

इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कई महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं:

  • आधुनिकीकरण: रांची बेकन फैक्ट्री को विश्वस्तरीय तकनीक से लैस करना।

  • अंतरराष्ट्रीय मानक: मांस प्रसंस्करण में इंटरनेशनल क्वालिटी मानकों को लागू करना ताकि निर्यात की संभावनाएं बढ़ें।

  • कौशल विकास: स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को मीट प्रोसेसिंग के क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण देना।

  • प्रशिक्षण केंद्र: भविष्य में इस क्षेत्र के लिए विशेष तकनीकी कोर्स और ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना की संभावना तलाशना।

  • वैज्ञानिक पशुपालन: पूरे राज्य में पारंपरिक पशुपालन के बजाय वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देना।

तकनीक और स्थानीय विकास का संगम

विशेषज्ञों का मानना है कि हैदराबाद के संस्थान की तकनीकी उत्कृष्टता और झारखंड के स्थानीय संसाधनों के बीच यह तालमेल राज्य को देश के मीट प्रोसेसिंग मैप पर मजबूती से स्थापित करेगा। इससे न केवल मांस की बर्बादी रुकेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को हाइजीनिक और पौष्टिक मांस उत्पाद उपलब्ध होंगे।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर कृषि एवं पशुपालन मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी और पशुपालन निदेशक आदित्य कुमार आनंद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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