रांची। जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन को निरस्त कराने की मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की कोशिश को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि इस स्तर पर मामले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा।

मुख्यमंत्री की ओर से दायर याचिका में निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत के इस फैसले के बाद अब यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा। अधिवक्ता दीपांकर रॉय ने बताया कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे या नहीं।

इससे पहले 4 मार्च को सीजीएम कृष्ण कांत मिश्रा ने आईपीसी की धारा 174 के तहत ईडी की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मामले को एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। ईडी का आरोप है कि जमीन घोटाला मामले में पूछताछ के लिए जारी आठ समन को मुख्यमंत्री ने नजरअंदाज किया था, जिसके बाद एजेंसी ने अदालत में शिकायत दर्ज कराई।

एमपी-एमएलए कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 जनवरी को निर्धारित की गई है। उल्लेखनीय है कि इसी मामले में 6 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सशरीर अदालत में उपस्थित हुए थे और उन्होंने 7-7 हजार रुपये के दो जमानत बॉन्ड भी भरे थे। इसी आधार पर उन्हें ट्रायल के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिली थी।

हाईकोर्ट के इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे जमीन घोटाला मामले में न्यायिक प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

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