Georgetown, (Guyana): वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर हुई अमेरिकी कार्रवाई ने उनके पड़ोसी देश गुयाना के लिए तरक्की के नए रास्ते खोल दिए हैं। मादुरो के सत्ता से हटने और अमेरिकी हिरासत में जाने के बाद गुयाना के नए तेल क्षेत्रों में निवेश करने के लिए दुनिया की बड़ी कंपनियों की लाइन लग गई है। कभी दक्षिण अमेरिका का बेहद गरीब देश रहा गुयाना, अब एक बड़ी आर्थिक ताकत बनकर उभर रहा है।

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करीब एक दशक पहले अमेरिकी कंपनी ने गुयाना के समुद्री क्षेत्र ‘स्टैब्रोक ब्लॉक’ में तेल के विशाल भंडार की खोज की थी। 10 लाख से भी कम आबादी वाले इस देश ने तेल निर्यात और रॉयल्टी के जरिए अपनी अर्थव्यवस्था को इतना मजबूत किया कि 2019 के बाद से यह दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया।

खत्म हुआ एसेक्विबो का डर

गुयाना को लंबे समय से वेनेजुएला की धमकियों और क्षेत्रीय विवाद का सामना करना पड़ रहा था। निकोलस मादुरो अक्सर गुयाना के तेल संपन्न ‘एसेक्विबो’ क्षेत्र पर कब्जे की धमकी देते थे और वहां सैन्य गतिविधियां बढ़ाते रहते थे। लेकिन इस साल की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के सैन्य ऑपरेशन के जरिए मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद यह तनाव कम हो गया है। मादुरो फिलहाल अमेरिका की जेल में हैं और उन पर भ्रष्टाचार व ड्रग्स के मामले चल रहे हैं।

दिग्गज तेल कंपनियों ने बढ़ाया निवेश

मादुरो के जाने से एक्सॉन मोबिल और शेवरॉन जैसी कंपनियों का भरोसा बढ़ा है। एक्सॉन के सीईओ डैरेन वुड्स ने संकेत दिए हैं कि अब विवादित क्षेत्रों में वेनेजुएला की नौसैनिक गश्त कम होगी, जिससे काम करना आसान होगा। शेवरॉन ने भी हेस कॉर्पोरेशन का अधिग्रहण कर इस क्षेत्र में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल कर ली है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि गुयाना में तेल उत्पादन की लागत करीब 30 डॉलर प्रति बैरल है, जो काफी कम मानी जाती है। अब पड़ोसी देश के साथ तनाव कम होने से विदेशी निवेशकों के लिए जोखिम घट गया है, जिससे आने वाले समय में गुयाना को अरबों डॉलर का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

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