Washington, (USA): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे कूटनीतिक गतिरोध पर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ लहजे में कहा है कि उन्हें इस बात की रत्ती भर भी फिक्र नहीं है कि ईरान अमेरिका के साथ जारी बातचीत को बीच में ही रोक सकता है। उनका मानना है कि ईरान ने बातचीत के नाम पर बहुत लंबा समय बर्बाद किया है और ट्रंप प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता हर हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है।
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सीएनबीसी (CNBC) के वरिष्ठ वाशिंगटन संवाददाता ईमोन जेवर्स के साथ फोन पर हुई एक विशेष बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने इन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि यदि वार्ता विफल होती है, तो उनकी रणनीति में कोई बदलाव आएगा। ट्रंप का यह तीखा बयान उस वक्त आया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में इस खबर के बाद हड़कंप मचा हुआ है कि ईरान अब बातचीत को आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है।
जब ट्रंप से सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या ईरान के साथ बातचीत अब पूरी तरह खत्म मान ली जाए, तो उन्होंने बेबाकी से जवाब दिया, “सच कहूं तो मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बातचीत खत्म हुई या नहीं। मुझे बिल्कुल भी परवाह नहीं है। अगर वार्ता खत्म हो गई है, तो हो गई है। अगर ऐसा नहीं भी हुआ है, तो मुझे लगता है कि उन्होंने हद से ज्यादा वक्त लिया। असल बात तो यह है कि यह पूरी बातचीत अब काफी उबाऊ लगने लगी थी।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर कूटनीति की आड़ में वक्त काटने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ईरान बातचीत को जानबूझकर लंबा खींच रहा था। इसमें बहुत ज्यादा समय जाया हो गया। मुझे पूरी तरह महसूस हो रहा था कि वे बस हमें टालने की कोशिश कर रहे थे।”
यह इंटरव्यू एक ऐसे नाजुक समय पर हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में कूटनीतिक कोशिशों के नाकाम होने के डर से भारी उथल-पुथल मची हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही ईरान के बातचीत से पीछे हटने की खबरें आईं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आठ प्रतिशत से ज्यादा का जबरदस्त उछाल देखा गया।
इसके बावजूद, राष्ट्रपति ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों पर किसी भी तरह की चिंता जताने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि तेल के दाम जल्द ही नीचे आ जाएंगे क्योंकि वैश्विक बाजारों में पहले से ही तेल का भारी स्टॉक मौजूद है। ट्रंप ने कहा, “इस समय करीब 1,700 जहाज तेल से लबालब भरे हुए हैं। यह स्टॉक बहुत जल्द एक बड़े प्रवाह की तरह बाजार में आएगा, जिससे कीमतें गिरेंगी।” उन्होंने समुद्री मार्गों के लंबे समय तक ठप रहने की आशंकाओं को भी खारिज कर दिया।
ईरान पर कड़ा आर्थिक शिकंजा कसने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा, “अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से ईरान को हर दिन लगभग 50 करोड़ डॉलर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, और वे इसे झेलते रहें। इस समय मेरी जिंदगी और मेरे प्रशासन का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि ईरान के हाथों में कभी भी परमाणु हथियार न आने पाएं।”
तेहरान को अंतिम चेतावनी देते हुए ट्रंप ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा, “अगर उन्होंने परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने की जरा भी कोशिश की, तो मैं उन्हें पूरी तरह तबाह कर दूंगा।” उन्होंने अमेरिकी जनता और दुनिया से अपील की कि अगर ईंधन की कीमतें थोड़ी बढ़ती भी हैं, तो उसे ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने की एक जरूरी कीमत के रूप में देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी नसीहत दी कि समुद्री रास्तों की सुरक्षा का आर्थिक बोझ अब यूरोपीय देशों को ज्यादा उठाना चाहिए, क्योंकि ऊर्जा के लिए उनकी निर्भरता अमेरिका से कहीं अधिक है।
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