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पितृपक्ष मेला 2026: गयाजी में आस्था का रिकॉर्ड सैलाब! 37.50 लाख पहुंचे श्रद्धालु

पितृपक्ष मेले में अब तक 37 लाख 50 हजार 200 श्रद्धालु गयाजी पहुंचे हैं। रूस, फ्रांस, जर्मनी समेत कई देशों के विदेशी श्रद्धालुओं ने भी पिंडदान किया।

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Patna: मोक्षधाम गयाजी में इस वर्ष पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची है। अब तक 37 लाख 50 हजार 200 तीर्थयात्री, श्रद्धालु और पिंडदानी गया पहुंच चुके हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के अलावा विदेशों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण कर रहे हैं।

रूस, फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्राजील और यूक्रेन समेत कई देशों के हजारों नागरिकों ने भी गयाजी में पिंडदान और तर्पण किया। विदेशी श्रद्धालुओं ने यहां उपलब्ध सुविधाओं, धार्मिक स्थलों की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और प्रशासन की ओर से किए गए इंतजामों की सराहना की।

8 अक्टूबर को फिर पहुंचेंगे विदेशी श्रद्धालु

गयाजी आने वाले विदेशी श्रद्धालुओं का सिलसिला अभी जारी है। 8 अक्टूबर को दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों से 30 से 40 श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने और पिंडदान करने की उम्मीद है।

विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता के साथ यहां आने वाले धार्मिक पर्यटकों की संख्या में हो रही वृद्धि को भी दर्शाती है।

हर साल बढ़ रही पर्यटकों की संख्या

गयाजी आने वाले पर्यटकों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

वर्ष 2022 में कुल 9 लाख 40 हजार पर्यटक गया पहुंचे थे। इनमें 9 लाख 38 हजार घरेलू और 1,518 विदेशी पर्यटक शामिल थे।

वर्ष 2023 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 29 लाख 89 हजार हो गई। इनमें 29 लाख 6 हजार घरेलू और करीब 82 हजार विदेशी पर्यटक थे।

वर्ष 2024 में कुल 30 लाख 59 हजार पर्यटक गयाजी पहुंचे। इनमें 29 लाख 4 हजार घरेलू और 1 लाख 55 हजार विदेशी पर्यटक शामिल थे।

वर्ष 2025 में कुल 34 लाख 79 हजार पर्यटक गयाजी पहुंचे थे। इनमें 34 लाख 77 हजार घरेलू और 1,807 विदेशी पर्यटक थे।

इस वर्ष पितृपक्ष मेले के दौरान अब तक 37.50 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने से गयाजी के धार्मिक पर्यटन की बढ़ती पहुंच सामने आई है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम

पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक व्यवस्था की गई है। मेडिकल उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के जरिए अब तक 1 लाख 12 हजार से अधिक लोगों को लाभ दिया जा चुका है।

वहीं, खोया-पाया केंद्र के माध्यम से 852 लोगों की सहायता की गई है। मेले से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम में अब तक 1,857 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिन पर आवश्यक कार्रवाई की गई है।

टेंट सिटी में 11 हजार से ज्यादा लोगों को ठहराया

दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए टेंट सिटी की व्यवस्था की गई है। अब तक इसमें 11 हजार 378 लोगों को ठहराया जा चुका है।

मेले में भीड़ के बीच बच्चों और बुजुर्गों के बिछड़ने की आशंका को देखते हुए 10 हजार 619 रिस्ट बैंड वितरित किए गए हैं। इससे परिजनों से अलग होने की स्थिति में उनकी पहचान और पुनर्मिलन में मदद मिल रही है।

AI अनुवाद सुविधा से विदेशी श्रद्धालुओं को मदद

भाषा की समस्या को दूर करने के लिए इस वर्ष AI आधारित भाषा अनुवाद सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। अब तक 84 हजार 756 तीर्थयात्री इस सुविधा का लाभ ले चुके हैं।

यह सुविधा खास तौर पर अलग-अलग भाषाएं बोलने वाले विदेशी श्रद्धालुओं के लिए संवाद करने और जरूरी जानकारी हासिल करने में मददगार साबित हो रही है।

पितरों की स्मृति में 482 पौधे लगाए

पितृपक्ष मेले को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए ‘एक पेड़ पूर्वजों के नाम’ पहल भी चलाई जा रही है। इसके तहत पितृवाटिका में अब तक 482 पौधे लगाए जा चुके हैं।

पूर्वजों की स्मृति में पौधरोपण की यह पहल धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है।

आस्था के साथ तकनीक और पर्यावरण पर जोर

गयाजी में पिंडदान और तर्पण की धार्मिक परंपरा के साथ इस बार स्वच्छता, स्वास्थ्य, सुरक्षा, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को भी मेले की व्यवस्थाओं से जोड़ा गया है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच प्रशासन की ओर से सुविधाओं और सहायता सेवाओं को भी व्यापक बनाया गया है।

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