रांची: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के पूर्व सदस्य राजन राम हत्याकांड मामले में कानून की प्रक्रिया अंतिम दौर में पहुँच गई है। रांची की अपर न्यायायुक्त अखिलेश कुमार तिवारी की अदालत में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई और ट्रायल पूरा होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। अदालत 1 अगस्त को इस पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी।
मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपित उग्रवादी याकूब केरकेट्टा का दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 313 के तहत बयान दर्ज किया गया। इस पूरे मुकदमे में अब केवल याकूब केरकेट्टा ही मुख्य आरोपित के रूप में सुनवाई का सामना कर रहा है, जबकि मामले में नामजद अन्य पांच आरोपितों को पर्याप्त साक्ष्य और गवाहों के अभाव में अदालत पूर्व में ही बरी कर चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, खूंटी जिले के कर्रा थाना क्षेत्र (छोटका रेगड़े गांव) का रहने वाला राजन राम पूर्व में उग्रवादी संगठन पीएलएफआई से जुड़ा हुआ था। संगठन में रहते हुए वह दो बार जेल भी जा चुका था। हालांकि, दो बच्चों का पिता बनने के बाद उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। उसने पीएलएफआई से नाता तोड़ लिया और शांति सेना से जुड़कर अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने लगा।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि राजन राम द्वारा संगठन छोड़ना पीएलएफआई के दस्ता सदस्यों को नागवार गुजरा। इसी रंजिश में 17 मार्च 2018 को जब राजन राम अपनी पत्नी से बड़काकुरा गांव जाने की बात कहकर निकला, तब तिलकेश्वर गोप और याकूब केरकेट्टा के उग्रवादी दस्ते ने घेरकर उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के बाद मृतक की पत्नी सुनीता देवी के बयान पर लापुंग थाने में प्राथमिकी (कांड संख्या 12/2018) दर्ज कराई गई थी। अब 6 साल बाद इस हत्याकांड में न्याय की उम्मीद बंधी है।




