रांची: जनहित की योजनाओं में लापरवाही और सरकारी कार्यों में बाधा डालना अब अधिकारियों और ग्रामीणों को भारी पड़ने वाला है। शनिवार को रांची समाहरणालय में आयोजित स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री का बेहद सख्त तेवर देखने को मिला। योजनाओं की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने न केवल स्पष्टीकरण मांगा, बल्कि वेतन रोकने तक के आदेश जारी कर दिए।

लापरवाही पर गिरी गाज : वेतन बंद और शोकॉज

बैठक के दौरान जब बेड़ो और मांडर प्रखंडों में कुपोषण उपचार केंद्रों (MTC) की समीक्षा की गई, तो वहां बच्चों के नामांकन में भारी कमी पाई गई। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित महिला पर्यवेक्षिकाओं का वेतन तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश दिया और उन्हें कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया। उन्होंने साफ कहा कि कुपोषित बच्चों की पहचान और उनका इलाज सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आंगनवाड़ी निर्माण में बाधा तो होगी कानूनी कार्रवाई

कांके और सोनाहातू प्रखंडों से यह शिकायत मिली कि कुछ स्थानीय लोग आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण और भूमि चिन्हितीकरण में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। इस पर डीसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी काम में रुकावट डालने वालों के खिलाफ विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, कार्य में बाधा पहुंचाने वाले संबंधित शिक्षक के विरुद्ध भी शोकॉज जारी करने का आदेश दिया गया।

झोलाछाप डॉक्टरों से रहें सावधान

स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर देते हुए उपायुक्त ने समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि वे ग्रामीण इलाकों में जनजागरूकता फैलाएं। उन्होंने कहा कि लोग बीमारियों के इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाकर अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें। सीडीपीओ और सहिया कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है कि वे ग्रामीणों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और संस्थागत प्रसव की ओर प्रोत्साहित करें।

पारदर्शिता और डिजिटल मॉनिटरिंग

उपायुक्त ने आंगनवाड़ी सेविका-सहायिका के चयन में पूर्ण पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही, पोषण ट्रैकर ऐप में शत-प्रतिशत डाटा एंट्री सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि योजनाओं की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग हो सके। ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ के तहत भी उन्होंने सत्यापन कार्य में तेजी लाने और डुप्लीकेसी रोकने के निर्देश दिए। अंत में, उन्होंने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की हिदायत दी।

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