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Health Desk: आज की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान और सुस्ती को लोग अक्सर सामान्य समस्या मान लेते हैं। अधिकतर लोग इसे काम के दबाव, कम नींद या मौसम के प्रभाव से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार महसूस होने वाली थकान को हल्के में लेना सही नहीं है, क्योंकि यह शरीर में पनप रही किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार थका हुआ महसूस करना केवल कमजोरी का लक्षण नहीं है। कई मामलों में यह मोटापा और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा करता है। शरीर का वजन बढ़ने पर विभिन्न अंगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति जल्दी थक जाता है और पूरे दिन ऊर्जा की कमी महसूस करता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि खराब खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मानसिक तनाव और पर्याप्त नींद न लेना भी थकान और सुस्ती के प्रमुख कारण हैं। यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इसे साधारण समस्या समझकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार थकान महसूस हो रही है तो उसे इसके पीछे के कारणों की जांच जरूर करानी चाहिए। खासतौर पर यदि थकान के साथ वजन बढ़ना, सांस फूलना, भूख कम लगना या शरीर में अन्य असामान्य बदलाव भी दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
थकान और सुस्ती से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संतुलित और पौष्टिक आहार, सीमित मात्रा में नमक, चीनी और तेल-घी का सेवन तथा नियमित व्यायाम शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। विशेषज्ञ प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट पैदल चलने, योग करने या किसी अन्य शारीरिक गतिविधि को अपनाने की सलाह देते हैं।
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गर्मी के मौसम में पर्याप्त पानी पीना भी उतना ही आवश्यक है। शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन के कारण भी कमजोरी और थकान की समस्या बढ़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी जीवनशैली और छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों को अपनाकर न केवल थकान और सुस्ती से बचा जा सकता है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

