Lifestyle Desk: आज के समय में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। हालांकि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से आंखों पर लगातार दबाव पड़ता है। इसके कारण आंखों में थकान, जलन, सूखापन, खुजली और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आंखों की नियमित देखभाल पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है।

आयुर्वेद में आंखों को शरीर का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग माना गया है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार आंखों की समस्याओं के पीछे गलत जीवनशैली, आंखों का जरूरत से ज्यादा उपयोग और मौसम में बदलाव जैसे कारण प्रमुख हो सकते हैं। इसलिए संतुलित खानपान, नियमित दिनचर्या और कुछ प्राकृतिक उपाय अपनाकर आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

आंखों को आराम देने के लिए आयुर्वेद में पादाभ्यंग यानी पैरों की तेल से मालिश को लाभकारी माना गया है। रोजाना गुनगुने तेल से पैरों की मालिश करने से शरीर को आराम मिलता है और आंखों की थकान कम करने में भी मदद मिल सकती है।

इसके अलावा दिन में कई बार ठंडे पानी से आंखों पर छींटे मारना भी फायदेमंद माना जाता है। इससे आंखों को ताजगी मिलती है और जलन व थकान से राहत महसूस हो सकती है।

योग में बताए गए कुछ सरल अभ्यास भी आंखों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। पामिंग तकनीक में दोनों हथेलियों को रगड़कर हल्का गर्म किया जाता है और फिर बंद आंखों पर रखा जाता है। इससे आंखों को आराम मिलता है और तनाव कम हो सकता है। वहीं, आंखों को दाएं-बाएं, ऊपर-नीचे और गोलाकार दिशा में धीरे-धीरे घुमाने वाले व्यायाम आंखों की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद करते हैं।

पारंपरिक योग अभ्यासों में त्राटक और सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बिताने को भी आंखों के लिए उपयोगी माना जाता है। हालांकि, किसी भी योग अभ्यास को सही तरीके से और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह के साथ करना बेहतर होता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लगातार लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बचें और बीच-बीच में आंखों को आराम दें। पढ़ाई या काम करते समय पर्याप्त रोशनी का उपयोग करें तथा मोबाइल, लैपटॉप या किताब को आंखों से उचित दूरी पर रखें। स्क्रीन देखते समय बार-बार पलकें झपकाना भी आंखों के सूखेपन को कम करने में मदद करता है। यदि आंखों में लगातार दर्द, धुंधलापन, तेज जलन, लालिमा या देखने में परेशानी जैसी शिकायत बनी रहे, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत किसी नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर देखभाल और सही आदतें अपनाकर आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

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