चांडिल। सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत कुकड़ू प्रखंड के ईचाडीह पंचायत स्थित आदरडीह चौका गांव में बुधवार देर रात जंगली हाथी के हमले से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। हाथी ने गांव में घुसकर जमकर उत्पात मचाया और ग्राम प्रधान गुरुपद गोप के घर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना में उनकी पत्नी घायल हो गईं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।
घटना रात करीब साढ़े दस बजे की बताई जा रही है। उस समय गुरुपद गोप अपने परिवार के साथ घर में सो रहे थे। अचानक तेज आवाज और दीवार टूटने की आहट से परिवार की नींद खुली। देखते ही देखते हाथी ने घर के एक हिस्से को तोड़ दिया। स्थिति को भांपते हुए परिवार के लोग किसी तरह घर से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर भागे। ग्रामीणों के अनुसार कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका अफरा-तफरी में बदल गया।
हाथी ने घर में रखे अनाज और घरेलू सामान को भी भारी नुकसान पहुंचाया। बोरा और डेगची में रखा चावल बिखेर दिया गया, जबकि बक्सों में रखे जरूरी कागजात और अन्य सामग्री भी नष्ट हो गई। घर की दीवारें और छप्पर क्षतिग्रस्त होने से परिवार के सामने रहने का संकट खड़ा हो गया है।
हमले के दौरान ग्राम प्रधान की पत्नी घायल हो गईं। बताया गया कि उनके सीने में अंदरूनी चोट आई है तथा पैर में गंभीर जख्म होने से काफी खून बहा। परिजनों और ग्रामीणों की मदद से उन्हें तत्काल इलाज के लिए ले जाया गया। घटना के बाद गांव के लोग पूरी रात भय के माहौल में जागते रहे।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चांडिल बांध विस्थापित और प्रभावित क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है। कुकड़ू, ईचागढ़ और चांडिल प्रखंड के कई गांवों में हाथियों के झुंड रात के समय पहुंचकर घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों और ग्रामीणों के बीच भय का माहौल बना हुआ है।
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि हाथियों के लगातार गांवों में आने की घटनाएं वन विभाग की तैयारी और प्रबंधन पर सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में एलिफेंट ड्राइव टीम और त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) होने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती। कई बार सूचना देने के बाद भी टीम देर से पहुंचती है, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाथी बार-बार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर क्यों आ रहे हैं। जंगलों में भोजन और पानी की कमी, हाथी कॉरिडोर का बाधित होना तथा लगातार बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि रात होते ही लोगों में डर का माहौल बन जाता है। बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं और महिलाएं खेतों में जाने से घबराने लगी हैं।
विस्थापित अधिकार मंच ने राज्य सरकार और वन एवं पर्यावरण विभाग से प्रभावित परिवार को तत्काल मुआवजा देने, घायल महिला का मुफ्त इलाज कराने तथा गांवों में स्थायी हाथी भगाओ दस्ता तैनात करने की मांग की है। साथ ही हाथी प्रभावित गांवों को ‘रेड जोन’ घोषित कर माइकिंग व्यवस्था, चेतावनी बोर्ड और होर्डिंग लगाने की भी मांग उठाई गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी समाधान की दिशा में शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जाएगा। इलाके के लोगों का मानना है कि हाथी कॉरिडोर की बहाली, जंगलों में पानी और चारे की पर्याप्त व्यवस्था तथा समय पर मुआवजा नीति ही इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान हो सकता है।



