रांची: ईद-उल-अज़हा (बकरीद) केवल एक पारंपरिक पर्व या उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि यह पवित्र त्योहार संपूर्ण मानवता को कुर्बानी, सुपुर्दगी, रज़ा और असीम मोहब्बत का पैगाम देता है। अल्लाह तआला ने इस दिन को महज़ खुशियाँ मनाने के लिए मुकर्रर नहीं किया है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक मायने छुपे हैं। यह पर्व हमें पैगंबर हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम और पैगंबर हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम की उस महान कुर्बानी, अटूट विश्वास और अल्लाह के प्रति उनके पूर्ण समर्पण की याद दिलाता है, जिसने इतिहास में वफादारी की एक बेमिसाल इबारत लिखी।
प्रतीकात्मकता से परे: आंतरिक बुराइयों का त्याग
अक्सर लोग इस पर्व को केवल जानवरों की कुर्बानी तक सीमित समझ लेते हैं, जबकि इसका वास्तविक संदेश बहुत व्यापक है। यह त्योहार इंसान को अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं, अहंकार, घमंड, नफ़रत, जलन और भीतर की तमाम बुराइयों की कुर्बानी देकर नेकी के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। सच्चा समर्पण वही है जो इंसान को खुदगर्जी से ऊपर उठाकर इंसानियत के सांचे में ढाल दे।
आज जिस तरह से हमारी उम्मत और आम अवाम विभिन्न प्रकार के कठिन हालातों और चुनौतियों से गुज़र रही है, ऐसे समय में समाज में एकता, भाईचारा, सब्र, दया और आपसी तालमेल की भावना को फैलाना सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है।
असली खुशी का फलसफा
इस त्योहार की असली खुशी अपने घरों तक सीमित रहने में नहीं, बल्कि अपने आसपास रहने वाले गरीबों, यतीमों, बेसहारा विधवाओं और जरूरतमंदों का खास ख्याल रखने में है। जब हम दूसरों के मुरझाए चेहरों पर मुस्कान लाते हैं, तभी हमारी इबादत मुकम्मल होती है।
सामाजिक जिम्मेदारी और स्वच्छता का संकल्प
इस पावन मौके पर हम सभी सुन्नत का पूरी शिद्दत से पालन करें। इसके साथ ही, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना और समाज के सभी वर्गों की भावनाओं का आदर करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है। शांति, अमन और सामाजिक सौहार्द को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है। कुर्बानी के जानवरों के साथ भी रहमदिली और अच्छा व्यवहार करने की हिदायत दी गई है। कुर्बानी का तबर्रुक (प्रसाद) सम्मानपूर्वक जरूरतमंदों तक पहुंचाकर ही हम इंसानियत और भाईचारे की सच्ची मिसाल पेश कर सकते हैं।
इस मुकद्दस मौके पर बारगाहे-इलाही में यह दुआ की जाती है कि अल्लाह तआला तमाम बंदों की इबादत, नेक नीयत से दी गई कुर्बानी और दुआओं को कुबूल फ़रमाए। हमारे मुल्क में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली का दौर कायम रहे और पूरी उम्मत को आपसी एकता, मोहब्बत और मेल-जोल के साथ रहने की तौफीक अता हो। पूरे देशवासियों सहित विशेष रूप से वार्ड 22 की सम्मानित जनता को ईद-उल-अज़हा की तहेदिल से मुबारकबाद।
लेखक-मो. असलम, पार्षद, वार्ड संख्या – 22, राँची नगर निगम



