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रांची: झारखंड उच्च न्यायालय ने आज एक महत्वपूर्ण आदेश सुनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) और किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई पर लगी रोक को अगले आदेश तक के लिए बढ़ा दिया है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को निर्धारित की है।
क्या है एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पेयजल घोटाले के आरोपी संतोष कुमार ने एयरपोर्ट थाना में ईडी अधिकारियों के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया। संतोष कुमार पर लगभग 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है। ईडी का दावा है कि 12 जनवरी को पूछताछ के दौरान संतोष कुमार ने खुद को चोट पहुंचाई और फिर एजेंसी को फंसाने के लिए झूठा आरोप लगाया। इसके बाद रांची पुलिस ने ईडी कार्यालय में छापेमारी की थी, जिसे ईडी ने ‘अवैध और दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
सुरक्षा के लिए तैनात होंगे अर्धसैनिक बल
मामले की गंभीरता और केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में संभावित हस्तक्षेप को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने पहले ही हिनू स्थित ईडी कार्यालय की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह कार्यालय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CISF या BSF जैसे अर्धसैनिक बलों की तैनाती करे। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक के लिए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।
ईडी की मांग : स्वतंत्र जांच की गुहार
ईडी के अधिवक्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया है कि राज्य पुलिस की जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती, इसलिए इस पूरे मामले की जांच CBI जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए। फिलहाल, अदालत इस याचिका की ‘मेंटेबिलिटी’ (सुनवाई योग्यता) पर विचार कर रही है। 24 फरवरी को होने वाली बहस यह तय करेगी कि क्या राज्य पुलिस की एफआईआर को पूरी तरह से रद्द किया जाएगा या जांच का जिम्मा किसी दूसरी एजेंसी को मिलेगा।

