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मुंह सूखना प्यास नहीं, इन खतरनाक रोगों का है शुरुआती संकेत

Health News: अक्सर हम मुंह सूखने या बार-बार प्यास लगने को मामूली डिहाइड्रेशन मानकर टाल देते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे ‘मुख शोष’ कहता है, जो शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का अलार्म हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लार का

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Health News: अक्सर हम मुंह सूखने या बार-बार प्यास लगने को मामूली डिहाइड्रेशन मानकर टाल देते हैं, लेकिन आयुर्वेद इसे ‘मुख शोष’ कहता है, जो शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का अलार्म हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लार का कम बनना केवल मुंह की समस्या नहीं है, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र, दाँतों की सुरक्षा और रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर सीधा हमला है। अगर आप भी पानी पीने के बावजूद सूखापन महसूस करते हैं, तो यह समय सतर्क होने का है।

वात-पित्त का बिगड़ता खेल और बीमारियों का संकेत

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों, जैसे चरक संहिता में मुंह सूखने को ‘रस धातु’ की कमी से जोड़कर देखा गया है। जब शरीर में वात दोष बढ़ता है, तो रूखापन आता है और पित्त दोष बढ़ने से भीतर जलन महसूस होती है। मेडिकल साइंस भी मानता है कि रात में मुंह सूखना डायबिटीज, स्लीप एप्निया या तनाव का बड़ा लक्षण हो सकता है। तनाव की स्थिति में हमारी लार ग्रंथियां दब जाती हैं, जिससे मुंह में बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं और मसूड़ों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

घी और मुलेठी: आयुर्वेद में छिपा है जादुई इलाज

इस समस्या से निपटने के लिए आयुर्वेद की रसोई में अचूक समाधान मौजूद हैं। ‘घृत पान’ यानी सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच देसी घी का सेवन रस धातु को गहराई से पोषण देता है। इसके अलावा, मुलेठी चूर्ण को शहद के साथ चूसने से लार ग्रंथियां सक्रिय होती हैं और गले की खराश दूर होती है। यदि मुंह से दुर्गंध आती है या स्वाद गायब हो गया है, तो ‘ऑयल पुलिंग’ (मुंह में तेल घुमाना) सबसे प्रभावी तरीका माना गया है।

शीतल आहार और नस्य कर्म से मिलेगा आराम

पित्त को शांत करने के लिए आंवले का रस और रातभर भीगा हुआ सौंफ-धनिया का पानी बेहद गुणकारी है। आयुर्वेद में ‘नस्य कर्म’ यानी नाक में गाय के घी की दो बूंदें डालने की सलाह भी दी जाती है, जो मस्तिष्क और श्वसन तंत्र की शुष्कता को कम करता है। अपनी डाइट में नारियल पानी, खीरा और मुनक्का जैसे शीतल खाद्य पदार्थों को शामिल करें। यदि घरेलू उपायों से आराम न मिले, तो किसी अनुभवी आयुर्वेदाचार्य से परामर्श जरूर लें, क्योंकि यह छुपी हुई बीमारियों का संकेत हो सकता है।

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